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मुर्दों से डर नहीं लगता साहब !

मुर्दों से डर नहीं लगता साहब !

मुर्दों से डर नहीं लगता साहब !

लेकिन हाड़ कंपाती सर्दी मौत लाती है…ये सर्द रात, ये आवारगी, ये नींद का बोझ, हम अपने शहर में होते तो घर गए होते, पर उनका क्या जिनकी जिंदगी गुजर गई और घर की तलाश पूरी नहीं हुई। मुफ्लिसी का ऐसा दंश, जब सर्दी का खौफ, मौत के खौफ से बड़ा हो जाए। ये बुजुर्ग श्मशान में जलती चिताओं के बीच बस इसलिए सो रहा है ताकि सर्दी न लगे। सोशल मीडिया में वायरल हो रही कानपुर की ये तस्वीर 75 साल की हमारी विकास यात्रा को फिर से तौलने के लिए काफी नहीं ?

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