हिन्दी गीत हैं कर्ण प्रिय,देते मधु रस घोल…..
हिन्दी पखवाड़ा समापन समारोह में कवियों ने बखानी हिन्दी की महिमा:
बच्चों ने भी मौलिक कविताओं का पाठ कर बांधी समां:
करछना। क्षेत्र के रामपुर स्थित बृजमंगल सिंह इंटर कॉलेज के सभागार में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह आयोजित किया गया। विद्यालय के प्रबंधक डॉ.भगवत पांडेय की प्रेरणा से अनवरत तीसरे वर्ष आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच पर पहुंचे कवियों ने हिन्दी की महिमा बखानी तो वहीं विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी मौलिक रचनाओं का काव्यपाठ कर खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे वरिष्ठ कवि रामलोचन सांवरिया और अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य मनीष कुमार तिवारी ने की। मोहिनी श्रीवास्तव की वाणी वंदना के उपरांत कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे डा.राजेंद्र शुक्ल ने कहा-देवनागरी लिपि सरल,सहज है इसके बोल।हिन्दी गीत हैं कर्णप्रिय,देते मधु रस घोल। शायर शबरेज अहमद ने कुछ इस तरह से हिन्दी का बखान किया-हिन्दी भुला दिया तो तुम्हें जानेंगे कैसे।वंशज रहीम, तुलसी के पहचानेंगे कैसे। कवि संजय पांडेय सरस की कविता ने बचपन के अतीत की स्मृतियों को जीवन्त किया,तो वहीं विपिन सिंह परिहार की कविता-एक युद्ध सबसे पहले स्वयं के विरुद्ध कर,खूब सराही गई। डॉ.वीरेंद्र कुसुमाकर ने पढ़ा -विश्व के पटल पर पहचान है हिन्दी।देश के उत्थान में वरदान है हिन्दी। रामलोचन सांवरिया की पंक्तियां- स्वस्थ रहे हिन्दी सदा,करें निरंतर योग। सांस्कृतिक सहयोग से रखिए देश निरोग,खूब सराही गईं। सामाजिक सरोकारों से जुडी़ कविता के चर्चित कवि संतोष शुक्ला समर्थ ने- मैं घर से अपनी मां के पांव छू के चला था। पीपल की,बरगद की छांव छू के चला था,जैसी पंक्तियों पर खूब तालियां बटोरी। कवि मुन्ना मासूम द्वारा प्रस्तुत गजल खूब सराही गई तो वहीं नारी सम्मान के प्रति समर्पित गीतकार जितेंद्र जलज के गीत ने भी खूब वाहवाही लूटी। विद्यालय के शिक्षक मोहम्मद परवेज सिद्दीकी,छात्र आयुष,सुभाष हर्षित और छात्रा श्रद्धा,खुशी,मनिता ने भी स्वरचित रचनाओं पर प्रभावित किया।अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य मनीष कुमार तिवारी ने कहा कि कवि हमारी लोक संस्कृति के संवाहक हैं। इनकी संदेश परक कविताओं से समाज को सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने सभी कवियों और बालकवियों को अंग वस्त्रम,सम्मान पत्र प्रदान करते हुए सम्मानित किया। इस मौके पर प्रवक्ता प्रदीप श्रीवास्तव,जितेंद्र कुमार,जगतपाल,सुरेश कुमार,विजय सिंह,सुधा सिंह,वेद श्रीवास्तव विश्वेष ओझा,कमला शंकर त्रिपाठी,कंचन पांडेय,राजकुमार विश्वकर्मा,विमला देवी, सुनील प्रजापति समेत बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहे।











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