पारम्परिक और आध्यात्मिक गीत समाज की थाती: डॉ.भगवत
लोक मंगल संस्थान में लोक कलाकारों की संगोष्ठी का आयोजन:
करछना। हमारी सनातन मान्यताओं के अनुरूप समाज में प्रचलित अपने आध्यात्मिक और पारंपरिक गीत हमारी अनमोल पूंजी और थाती हैं।लोक कलाकारों को चाहिए कि इन्हें सजोते हुए अपनी नई पीढ़ी में इस परंपरा का सृजन करें। क्षेत्र के रामपुर स्थित लोकमंगल संस्थान में आयोजित लोक कलाकारों की संगोष्ठी के बीच यह बातें संस्थान के संरक्षक और मिशन के संयोजक डॉ.भगवत पांडेय ने कही। उन्होंने अपनी युवा पीढ़ी में पौराणिक आख्यानों के जुड़े गीतों के साथ साथ हमारी मान्यताओं और देवी-देवताओं की महिमा से युक्त गीतों का भी प्रचार प्रसार करने पर जोर दिया। मोहन जी द्वारा प्रस्तुत हनुमत वंदना के उपरांत,जमुनापार लोक कलाकार समिति के अध्यक्ष श्यामलाल बेगाना ने आध्यात्मिक गीत पर खूब तालियां बटोरी तो वहीं वरिष्ठ लोक कलाकार रामबाबू यादव ने भी अपने गीतों में हनुमत महिमा का बखान किया। लोक कलाकार इंद्रजीत यादव,फूलचंद यादव ने राधेश्याम कृत रामायण की चौपाइयों का पाठ कर खूब वाहवाही लूटी। अशर्फी लाल और संजय शर्मा के गीत ग़ज़ल खूब सराहे गये। लोक गायिका मोहिनी श्रीवास्तव ने प्रस्तुत गंगा गीत और राम केवट संवाद से संबंधित गीत प्रस्तुत करते हुए तालियां बटोरी। शायर सबरेज अहमद के मुक्तकों में गंगा -जमुनी तहजीब की झलक मिली तो वहीं संगोष्ठी का संचालन कर रहे वरिष्ठ गीतकार डॉ.राजेंद्र शुक्ल ने अपने समाज में संस्कार और उपासना गीतों को सहेजने हेतु कलाकारों को आगे आने पर बल दिया। अध्यक्षता कर रहे संस्थान के प्राचार्य लोक कवि रामलोचन सांवरिया ने कई सुझाव देते हुए कलाकारों को सीखने सिखाने पर जोर दिया। इस दौरान आगामी जून माह में तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर भी विचार विमर्श किया गया। संगोष्ठी के संयोजक हास्य कवि अशोक बेशरम ने सभी के प्रति स्वागत आभार प्रकट किया। इस मौके पर राष्ट्र गौरव तिवारी,कुश श्रीवास्तव,वेद श्रीवास्तव,मानिक लाल ओझा,शोभनाथ द्विवेदी,आशुतोष,हर्षवर्धन सिंह,विजयपाल,अतुल तिवारी,विनय सिंह,देवेश त्रिपाठी समेत कई कलाकार और प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।










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