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एक युवा व्यक्ति का सुंदर पौधा


पढ़ने से पहले धीरे से अपनी आँखें बंद करें… अपना ध्यान अपने ह्रदय पर लाए… एक गहरी श्वास लें… और एक विचार करें कि इस श्वास के द्वारा ऑक्सीजन जो भीतर जा रही है वो कहाँ से आ रही है… पढ़ना जारी रखें…

एक युवा व्यक्ति का सुंदर पौधा

एक वृद्ध सेवानिवृत्त व्यक्ति के पड़ोस में एक युवक रहता था। वे दोनों ही बाग़वानी का शौक रखते थे और बगीचे में अपने पौधों की देखभाल करते थे। जो युवा था वह हमेशा चाहता था कि उसका बगीचा पड़ोसी के बगीचे से बेहतरीन दिखे।

एक बार दोनों ने अपने बगीचे में एक जैसे पौधे लगाये।

युवक पौधों को ढेर सारा पानी और खाद देता था और वहीं वृद्ध व्यक्ति अपने पौधों को थोड़ा सा पानी और थोड़ी मात्रा में खाद देते थे।

युवक के पौधे सुंदर, हरे और घने पौधो के रूप में विकसित हो रहे थे जबकि वृद्ध व्यक्ति के पौधे काफी सामान्य लग रहे थे।

कुछ दिनों बाद एक रात भारी बारिश हुई।

सुबह जब युवक ने अपने बगीचे को देखा तो पाया कि वे पौधे जो बड़े और हरे भरे हो गये थे, वह जड़ से उखड़ कर गिर गए हैं, जबकि पड़ोसी व्यक्ति के जो पौधे थे, वह जड़ से अलग नहीं हुए थे।

जल्द ही पड़ोसी व्यक्ति भी अपने घर से बाहर अपने बगीचे की जाँच करने आये।

युवक अपने पड़ोसी के पास गया और उनसे पूछा, “मेरे पौधे इतने बड़े और हरे भरे थे। मैंने इनका ख्याल भी बहुत अच्छे से रखा था। बहुत ज्यादा इनको पानी और खाद भी दिया था। फिर भी कल रात की आंधी , तूफान और बारिश में यह पौधे उखड़ गए। जबकि आप अपने पौधों का इतना ख्याल नहीं रखते, जितना मैं रखता हूँ। फिर भी आप के पौधे नहीं उखड़े। इसका क्या कारण है, ऐसा क्यों हुआ?

वृद्ध व्यक्ति ने उत्तर दिया, “देखो, तुम हर वह चीज़ जरूरत से ज्यादा दे रहे थे जिसकी पौधों को आवश्यकता थी। इस वजह से उन पौधों की जड़ें अपने आप को पोषित करने के लिए कभी सतह से नीचे गहराई में गई ही नहीं, इसलिए वह मजबूत होने की बजाय कमजोर हो गई। मैं उन्हें जीवित रखने के लिए पर्याप्त आपूर्ति ही करा रहा था, पर वह बाकी के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए वह जमीन के अंदर और गहरे और गहरे बढ़ने लगी इसलिए उनकी उस जमीन पर पकड़ बहुत मजबूत हो गई।

क्योंकि तुम्हारे पौधे की जड़े गहराई में ना होने की वजह से वे तेज आंधी और हवा को झेल ना पाए और उखड़ गए जबकि जो मैंने पौधे लगाए उनकी जड़ें गहराई में होने की वजह से बाहर की आंधी उन्हें हिला तो गई, पर उन्हें उखाड़ नहीं पाई।

बात तो बड़ी सरल सी कहीं, पर उसका बहुत गहरा मतलब था। जीवन में हम झांक कर देखे तो कई बार हम भी अपने बच्चों को उनकी जरूरतों की सारी चीजें जरूरत से ज्यादा उन्हें उपलब्ध करा देते हैं और फिर जीवन के किसी पड़ाव पर अगर कुछ कमी आती है, तो वह उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। क्या हम वास्तव में बच्चों को मजबूत बना रहे हैं या उनकी हर जरूरत को पूरा करके उनकी जड़ों को कमजोर बना रहे हैं?
“बढ़ते बच्चे पौधों की तरह होते हैं – उन्हें प्यार और धूप की जरूरत होती है, और उन्हें बढ़ने के लिए आजादी की भी जरूरत होती है।”
चारीजी

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