😄*90 साल के वयोवृद्ध से एक 25 साल के युवक ने पूछा कि अब तबीयत कैसी है दादा! क्या हाल चाल है?
तो संस्कृत का ज्ञाता होने के नाते उस युवक को मन्त्र वाली भंगिमा में उतर दिया कि वृद्धावस्था में क्या हालत होती है, क्या कष्ट होता है, जरा ध्यान से पढ़ियेगा आनंद आएगा..
बुढ़ापे का सवाल है….
मुखे न दातं, माथे न बालं,
बधिर कानं, पोपले गालं,
दुखं अंगं, सिकुडं खालं
न शेष सुरं, न शेष तालं,
वैद्यम् बुलावं, पूछं हालं,
काया अकड़म, मकड़ीम जालं,
वैद्यम् उवाचं, परहेज पालं,
चटनी, अचारं सब त्याग डालं,
अब रोटी ज्वारं च फीकी दालं,
शांति गुजारं अब शेष सालं,
भोजन थाली रूखीसूखी घालं,
देखे बनावे मुख पीत, लालं,
सब खावे पूड़ी हलवा थालं,
मुखे टपके टप टप रालं,
बहुएँ भी टोकं, पौत्रं भी टालं,
पुत्रम भी अब तो गृहे निकालं,
सम्मुख आवे जवानी ख़यालं,
व्याधि तलवारं, बुढ़ापा ढालं
अब कौन पूछे, ये प्रश्न विशालं,
न बैंक बैलेंसं, न पास मालं,
स्वास्थ्य गिरावं, ज्यों वृक्षे छालं,
पग पग आवे, समीप कालं,
अब ना पूछो हालं, न पूछो चालं,
अब ना पूछो हालं, न पूछो चालं.
😄😇









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