Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

भेड़ का झुंड

महसूस करें – मैं कृतज्ञ हूँ मेरे चारों ओर के प्रेम से भरे हर एक रिश्ते के लिए

भेड़ का झुंड

एक राजा था। उसका मंत्री बहुत बुद्धिमान था। एक बार राजा ने अपने मंत्री से प्रश्न किया – “मंत्री जी! भेड़ों और कुत्तों की पैदा होने की दर में तो कुत्ते भेड़ों से बहुत आगे हैं, लेकिन भेड़ों के झुंड के झुंड देखने में आते हैं और कुत्ते कहीं-कहीं एक-आध ही नजर आते है। इसका क्या कारण हो सकता है ?”

मंत्री बोला – “महाराज! इस प्रश्न का उत्तर आपको कल सुबह मिल जायेगा।”

राजा के सामने उसी दिन शाम को, मंत्री ने एक कमरे में बीस कुत्ते बंद करवा दिये और उनके बीच रोटियों से भरी एक टोकरी रखवा दी।

दूसरे कमरे में बीस भेड़ें बंद करवा दीं और चारे की एक टोकरी उनके बीच में रखवा दी। दोनों कमरों को बाहर से बंद करवाकर, वे दोनों लौट गये।

सुबह होने पर मंत्री राजा को साथ लेकर वहाँ आया। उसने पहले कुत्तों वाला कमरा खुलवाया। राजा को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि बीसों कुत्ते आपस में लड़-लड़कर अपनी जान दे चुके थे और रोटियों की टोकरी ज्यों की त्यों रखी थी। कोई कुत्ता एक भी रोटी नहीं खा सका था।

इसके पश्चात मंत्री राजा के साथ भेड़ों वाले कमरे में पहुँचा। कमरा खोलने के पश्चात राजा ने देखा कि बीसों भेड़ एक दूसरे के गले पर मुँह रखकर, बड़े ही आराम से सो रही थीं और उनकी चारे की टोकरी एकदम खाली थी।

मंत्री राजा से बोला – “महाराज! कुत्ते एक भी रोटी नहीं खा सके तथा आपस में लड़-लड़कर मर गये। उधर भेड़ों ने बड़े ही प्रेम से मिलकर चारा खाया और एक दूसरे के गले लगकर सो गयीं।

यही कारण है, कि भेड़ों के वंश में वृद्धि है, समृद्धि है। उधर कुत्ते हैं, जो एक-दूसरे को सहन नहीं कर सकते। इसलिए उनके वंश में वृद्धि नहीं है।”

राजा मंत्री की बात से पूरी तरह संतुष्ट हो गया। उसने उसे बहुत-सा पुरस्कार दिया। वह मान गया था कि आपसी प्रेम तथा भाईचारे से ही वंश वृद्धि होती है।

मंत्री ने इस संबंध में राजा को एक कहानी सुनायी –

एक बार ब्रह्मा ने देवता तथा असुरों की एक सभा बुलवायी। सभी देवता तथा दानव ब्रह्मा के दरबार में उपस्थित हुऐ। ब्रह्मा ने वैसे तो दोनों ही समुदायों की बड़ी आवभगत की, लेकिन देवताओं के प्रति उनके मन में अधिक श्रद्धा तथा सम्मान था।

दानवों ने इस बात को भाँप लिया कि ब्रह्मा के मन में देवताओं के प्रति अधिक मान-सम्मान है। केवल दिखाने के लिए वे बराबर का बर्ताव कर रहे हैं।

दानवों ने ब्रह्मा से कहा – “ब्रह्मा जी! देखिये आप देवताओं को अधिक महत्त्व दे रहे हैं। उनके प्रति आपके ह्रदय में अधिक सम्मान है। अगर ऐसा ही है, तो फिर हमें यहाँ क्यों बुलवाया!”

ब्रह्मा ने बहुत समझाया बुझाया किंतु दानवों का क्रोध कम नहीं हुआ।
अब तो ब्रह्मा ने संकल्प लिया कि दानवों को इस बात का बोध कराना ही होगा कि वे देवताओं की बराबरी नहीं कर सकते।

ब्रह्मा जी ने असुरों के राजा से कहा – “मुझे प्रसन्नता होगी, यदि आप देवताओं के समान बन जायें, उनसे पीछे न रहें।”

“हम तो पहले ही उनसे बहुत आगे हैं।” असुरों के राजा ने अकड़कर कहा।

“बुरा ना मानें, तो मैं आपकी परीक्षा ले लूँ?” ब्रह्मा जी ने पूछा।

“ठीक है, हो जाये परीक्षा!” दानवों के राजा ने कहा।

रात के भोजन में ब्रह्मा जी ने देवताओं, दानवों सबके हाथों पर उंगलियों तक डंडे बंधवा दिये, जिससे दोनों हाथ मुड़ न सकें।

सबसे पहले ब्रह्मा ने असुरों के आगे लड्डूओं के बड़े-बड़े थाल परोसे और कहा कि “जो अधिक लड्डू खायेगा, वही श्रेष्ठ होगा।”

दानवों ने लड्डू उठा तो लिये किंतु हाथ में डंडे बंधे होने के कारण वे लड्डूओं को अपने मुँह तक नहीं ले जा सके और ऊपर उछाल कर मुँह मे लेने का प्रयास करने लगे। यह एक विकट समस्या उत्पन्न हो गयी। बहुत प्रयास करने के पश्चात भी कोई भी दानव लड्डू खाने में सफल नहीं हो सका। सभी उठ गये।
अब देवताओं की बारी आयी, उनके हाथ पर भी उसी प्रकार डंडे बांधे गये थे, उनके हाथ भी मुड़ नहीं सकते थे।

पंक्ति में बैठे सभी देवताओं के सम्मुख लड्डू परोसे गये। देवताओं ने दो-दो की जोड़ी बना ली। एक देवता दूसरे देवता को लड्डू खिला रहा था। सभी दानव यह तमाशा देख रहे थे। उन्हें मानना पड़ा कि वास्तव में देवता दानवों से श्रेष्ठ हैं।

राजा को मंत्री की कहानी बहुत पसंद आयी। वह मान गया कि वास्तव में एकता और प्रेम द्वारा कोई भी कार्य किया जा सकता है!

दोस्तों जीवन में वास्तव में हमारी समस्या यह है कि हम एक दूसरे को प्रतिस्पर्धा से जीतना चाहते हैं। एक बार प्रेम से जीतने का प्रयास तो करके देखें

जब हम स्वीकार करना और प्रेम करना सीख लेते हैं, तब हमारे जीवन का हर पहलू फलने-फूलने लगता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *