10 गुरु परंपरा के गुरु द्वारा देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाया
सभी संगतो को दीपावली और बंदी छोड़ दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं साथ में ही हमें बंदी छोड़ दिवस की जानकारी भी होनी चाहिए ।
मुगल राजा अकबर और जहांगीर के समय देश के 52 राजाओं को ग्वालियर की जेल में डाला हुआ था ।यह वह राजे थे जो मुगल बादशाह के विरुद्ध कुछ ना कुछ ऐसी बात कह देते थे जिसकी वजह से उनको पकड़ कर जेल में डाल दिया जाता था ।परंतु 10 गुरु परंपरा की छेंवी पातशाही सिख गुरु हरगोबिंद जी ने इन राजाओं को छुड़वा कर देश के प्रति अपने जिम्मेवारी का निर्वाह किया। इन राजाओं को जेल में ही स्लो पाइजन दिया जाता था ताकि धीरे धीरे यही एडिया रगड़ ते हुए मर जाएं। परंतु जब गुरु हरगोबिंद जी को जहांगीर में ने जेल में बंद किया तो गुरु जी ने वहां का भोजन खाने से मना कर दिया और केवल गुरु का लंगर खाने के लिए अपनी सहमति दी तो उनके लिए बाहर से ही लंगर बनकर जाता था ।गुरु हरकिशन जी ने जेल में जाकर सभी राजाओं के साथ सत्संग करना शुरू कर दिया था ।गुरु हरकिशन जी तो खुद ही परमात्मा का स्वरूप थे। जब जहांगीर बीमार हुआ तो साईं मियां मीर ने भी जहागीर को सलाह दी” एक पवित्र अध्यात्मिक आत्मा “को आपने जेल में बंद किया हुआ है इस कारण से आप बीमार है तो जहांगीर ने गुरु हरगोबिंद जी को छोड़ने की इजाजत दे दी जब जेल में बंद राजाओं को भी पता लगा के गुरु हरगोबिंद जी को छोड़ा जा रहा है। राजाओं ने हरगोविंद जी से विनती की जिस तरीके से आप से सत्संग कर रहे हैं अब हम आपके बगैर नहीं रह सकते तो गुरु हरगोबिंद जी ने भी अकेले जेल से निकलने के लिए मना कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं अकेला नहीं जाऊंगा मेरे साथ तो यह सत्संग करने वाले लोग भी जाएंगे तब जहांगीर ने कहा कि जो आप का चौला पकड़ कर बाहर निकल जाएगा तो हम उसको भी बाहर जाने देंगे ।तो गुरु हरगोबिंद जी ने 52 कलियों का चौला बनवाया ( कुर्ता) बनवाया और उन 52 लोगों ने एक एक कली पकड़कर गुरु हरगोबिंद जी के साथ आजाद हुए यह सारे ही राजे हिंदू राजे थे।
ग्वालियर की जेल से निकलकर हरगोविंद जी दीपावली वाले दिन ही अमृतसर में पहुंचे थे और उसी खुशी में भी दीपमाला पूरे अमृतसर में की गई थी ।









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