दीपावली-पर्वणः शुभाशयाः —
वन्द्येते मनुजैर्यदाद्यदिनयोर्धन्वन्तरिश्चान्तक:,
ऊर्जे दर्शतिथौ समुद्रतनयापूजा तृतीये दिने।
गो-गोवर्धनवन्दनाग्रिमदिने भ्रातृद्वितीयान्तिमे,
सैषा पर्वपरम्परा सुखमयी “दीपावली” राजताम्।।
अर्थ-जिसके आरम्भिक दो दिनों में मनुष्य धन्वन्तरि और यम की वन्दना करते हैं,जिसके तीसरे दिन कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है,अगले दिन गाय और गोवर्धन की वन्दना की जाती है तथा अन्तिम दिन भाईदूज का त्योहार मनाया जाता है,ऐसी यह पांच दिनों की सुखमयी पर्व-परम्परा दीपावली सदा सुशोभित होती रहे।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक” जी की ओर से आप सभी को पंच दिवसीय प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
।। सबका मंगल हो ।।










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