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ठहाकों से गूंजा पूजा पंडाल, तिवारी बंधुओं ने बांधी समां

ठहाकों से गूंजा पूजा पंडाल, तिवारी बंधुओं ने बांधी समां

ठहाकों से गूंजा पूजा पंडाल, तिवारी बंधुओं ने बांधी समां
करछना। क्षेत्र के केचुहा गांव में चल रहे नवरात्र दुर्गा पूजा जागरण में शनिवार को देर रात तक महफिल ठहाकों से गूंजती रही तो वहीं तिवारी बंधुओं के भोजपुरी लोक संगीत ने भी खूब समां बांधी। हास्य के चर्चित कवि संचालक अशोक बेशरम ने अपनी हास्य व्यंग्य रचनाओं पर घंटों श्रद्धालुओं श्रोताओं को लोटपोट करते रहे। उनकी कविता, जैसे नई दरोगा आईं रामनगर कै थाने मा,अइसी अउरत कबहूं नांही देखें रहे जबाने मा,खूब गुदगुदाती रही। कवि संतोष शुक्ला समर्थ ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविता में कहा- किसी सूनी सी अंगनाई में चिड़िया गा नहीं सकती।रहे घर में कोई भूखा तो बिटिया खा नहीं सकती।इसके बाद तिवारी बंधुओं और भोजपुरी गायिका अमृता ने निमिया के पेड़वा माई डारि के झुलनवा जैसे भोजपुरी देवी गीतों की प्रस्तुतियों पर तालियां बटोरते हुए खूब समां बांधी। देर रात तक गीत और भजनों पर मंत्रमुग्ध श्रोता पूजा पंण्डाल में मां के जयकारे लगाते रहे। दुर्गा जागरण के आयोजक मंण्डल द्वारा मंच पर कवियों कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन, समाज सेवी,और ग्रामीण मौजूद रहे।

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