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शख्सियत: पर्वत पुरुष, जिन्होंने पहाड़ तोड़कर बनाई सड़क

शख्सियत: पर्वत पुरुष, जिन्होंने पहाड़ तोड़कर बनाई सड़क

शख्सियत: पर्वत पुरुष, जिन्होंने पहाड़ तोड़कर बनाई सड़क

दशरथ मांझी एक ऐसा नाम जिसने कभी मजबूरियों के आगे घुटने नहीं टेके। गहलौर के पहाड़ से पत्नी गिर कर मरी तो उसी पहाड़ के सीने को अपने फौलादी हाथों से चीर दिया। अतरी व वजीरगंज की दूरी 55 KM से 15 KM कर दी। मांझी के इस साहसिक कार्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा। मांझी पर मुहावरा भी है ‘क्या पहाड़ तोड़ने से भी कठिन है?’ दशरथ का जन्म 14 जनवरी 1929 को बिहार के गया जिले के गहलौर में हुआ था।

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