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एक अनोखा पत्र

एक अनोखा पत्र

_आज की प्रेरक कहानी पढ़ने से पहले… धीरे से अपनी आँखें बंद करें… अपना ध्यान अपने ह्रदय पर लाएं… अपनी उपस्थिति को महसूस करें…विचार करें कि मेरे वजूद का वास्तविक लक्ष्य क्या है…पढ़ना जारी रखें…
आपका मित्र
🙏🏻🙏🏻डॉ दर्शन बांगिया

एक अनोखा पत्र

आज यह प्रसंग हमको इस बात के लिए प्रेरित करता है कि दुनिया में एक अच्छा इंसान होना ईश्वर के द्वारा दिया गया सबसे बड़ा उपहार है।

मिस्टर कुएस्टर कई वर्षों से एक बहुत ही कठिन प्रश्न के प्रति आसक्त थे। वह शिकागो ट्रिब्यून में किडन्यू कॉलम के लेखक हैं। पिछले 10 सालों में उन्हें बच्चों के हजारों पत्र मिले…

जिसमे लगातार एक ही प्रश्न बच्चे पूछते रहे कि भगवान अच्छे लोगों को पुरस्कृत करने के लिए क्यों नहीं प्रकट होते और बुरे लोगों को दंडित क्यों नहीं करते हैं?

जब भी उन्हें इन पत्रों का सामना करना पड़ता था, तो वे हमेशा बहुत भारीपन महसूस करते थे क्योंकि उन्हें सच में नहीं पता था कि इन सवालों का उन बच्चों को क्या जवाब दूँ।

इन पत्रों में उन्हें एक पत्र बहुत अच्छे से याद था। एक बच्ची जिसका नाम मैरी था जिसने 1963 में शिकागो ट्रिब्यून को एक पत्र लिखा था। पत्र में उसने बताया कि वह अपनी माँ को मेज पर कुकीज रखने और दूसरे कार्यो में मदद करती है। उसे समझ में नहीं आता है कि अच्छा बच्चा होने पर भी उसकी सिर्फ प्रशंसा की जाती है। जबकि उसका भाई डेविड , जो कुछ नहीं करता और बहुत शरारती था फिर भी उसे उपहार स्वरूप कुकीज़ मिल जाती थी। इसलिए वह मिस्टर कुएस्टर से पूछना चाहती थी कि भगवान ऐसा क्यों करते हैं। मिस्टर कुएस्टर नहीं जानते थे कि उन्हें इस पत्र का जवाब कैसे देना चाहिए। यह सोच काफी दिनों तक उनके भीतर चलती रही।

कुछ दिनों के बाद उनके एक दोस्त ने उन्हें शादी में आमंत्रित किया। उस शादी में जब वह गए थे तो वहाँ उन्हें अपने इस प्रश्न का ऐसा जवाब मिला कि वह इस शादी के अवसर के लिए जीवन भर उस खुदा के आभारी रहेंगे। शादी के दौरान पुजारी द्वारा विधि समाप्त करने पर जब दूल्हा-दुल्हन को एक दूसरे को अंगूठी पहनाने के लिए कहा गया था तब दोनों एक दूसरे में इतना खोए हुए थे कि उन्होंने एक दूसरे को दाहिने हाथ में अंगूठी पहनाने की गलती कर दी। पुजारी ने जब यह देखा तो मुस्कुराते हुए बड़े हल्के-फुल्के अंदाज में उन्हें याद दिलाया कि दाहिना हाथ पहले से ही सही है, मुझे लगता है कि आपको बाएं हाथ को सजाने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

इस बात का मिस्टर कुएस्टर पर इतना अधिक प्रभाव पड़ा कि उन्हें उन पत्रों का क्या जवाब दे ,उसके लिए भीतर से प्रेरणा मिल गई। उन्हें समझ आया कि एक सही व्यक्ति और एक अच्छे व्यक्ति को बाहरी उपहारों की क्या जरूरत, उसका अपना जीवन ही उसके और इस दुनिया के लिए एक उपहार स्वरूप है। तब मिस्टर कुएस्टर इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि, “एक अच्छा व्यक्ति होना ही उस व्यक्ति को खुदा द्वारा दिया गया सबसे बड़ा उपहार है।”

इस प्रेरणा के अनुभव से मिस्टर कुएस्टर बहुत उत्साहित थे। उन्होंने तुरंत एक पत्र उस बच्ची मैरी को लिखा और जवाब मे लिखा कि “एक अच्छा बच्चा होना ही आपके लिए भगवान का सर्वोच्च पुरस्कार है।”

शिकागो ट्रिब्यून में इस पत्र के प्रकाशित होने के कुछ ही समय बाद, अमेरिका और यूरोप के एक हजार से अधिक समाचार पत्रों ने इसे फिर से प्रकाशित किया। उसके बाद इसे हर साल बच्चों के उत्सव के दौरान प्रकाशित किया गया।

एक अच्छा इंसान होना, जो आगे बढ़ने के लिए दूसरों के सहारे पर निर्भर नहीं है, वास्तव में यही कुदरत के द्वारा दिया गया अमूल्य उपहार है।

आप जैसे हैं वैसे ही परिपूर्ण हैं, प्रोत्साहन के लिए आपको हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है…और यह वास्तव में गर्व करने की बात है।

“किसी को भी प्रभावित करने की आवश्यकता नहीं, बस आप जो हैं वह बने रहें, स्वाभाविक और सच्चे..!!”
🙏🏻🙏🏿🙏🏾जय जय श्री राधे

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