अगर तुम हंस कर बोलो तो सिकंदर टूट जाता है।
कुशगढ़ शिव धाम में जुटे कवियों ने श्रोताओं को जी भर गुदगुदाया।
करछना। क्षेत्र के कुशगढ़ शिव धाम में अभिनव राष्ट्रीय साहित्य मंच द्वाराआयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और होली मिलन समारोह में जमकर ठहाके लगे। मंच पर पहुंचे युवा कवियों ने रचनाओं द्वारा सामाजिक कुरीतियों और राजनीतिक विसंगतियों पर तंज कसते हुए खूब तालियां बटोरी। कवि सम्मेलन का शुभारंभ आलोक सिंह द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना के साथ शुरू हुआ। चर्चित हास्य कवि अशोक बेशरम ने संचालन के दौरान कहा कि अगर तुम हंस कर बोलो तो सिकंदर टूट जाता है, उछलते ज्वार भाटो में समुंदर टूट जाता है। उनकी हास्य क्षणिकाओं पर खूब ठहाके लगे। मंच के अध्यक्ष कवि अली इलियास की धारदार रचनाओं ने श्रोताओं को रोमांचित किया तो वहीं रविशंकर विद्यार्थी के गीतों ने भी खूब समां बांधी। संतोष शुक्ला समर्थ ने कहा,बरगद की पीपल की छांव छू के चला था,मैं घर से अपनी मां के पांव छू के चला था। नजर इलाहाबादी ने व्यंग रचनाओं पर खूब ठहाके लगवाए तो वहीं राजकुमार अंजाना ने भी प्रस्तुत कविता में खूब वाहवाही लूटी। कमलेश कमल,धीरेंद्र सिंह नागा,शशि सुमन ने भी अपनी रचनाओं में लोगों को प्रेम सद्भाव का संदेश दिया। ओज कविअजय प्रेमी और राजीव गहरवार की रचनाओं पर लोटपोट हो गए। व्यवस्थापक विनायक,राजकुमार मिश्र,रिंकू सिंह,राजेश शुक्ल समेत सभी कवियों को राष्ट्रीय अभिनव साहित्य मंच द्वारा मंच पर सम्मानित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रोता गण मौजूद रहे।










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