उच्चतर लक्ष्य को पाने के लिए हमे क्या करना होगा?
आकाश
एक शाम आकाश खेलते-खेलते अपनी माँ के कमरे में गया। उसकी माँ मेज पर बैठे कुछ लिख रही थी। अचानक माँ की निगाह उस पर गई तो देखा कि उसके हाथ में एक फूलदान है, जो उन्हें आकाश की दादी ने उपहार में दिया था।
अपने बेटे के हाथ में वह फूलदान देखकर माँ चिंतित हो उठी और बोली, “आकाश, उस फूलदान को नीचे रख दो बेटा, कहीं गलती से गिर गया तो टूट जाएगा।”
आकाश ने जवाब दिया, “माँ, मैं इससे अपना हाथ बाहर नहीं निकाल सकता।”
माँ ने अब अपना काम छोड़ दिया, ध्यान से उसकी ओर देखा और कहा, “बिल्कुल, आप इसे नीचे रख सकते हैं।”
“माँ मैं जानता हूँ, लेकिन मैं इस फूलदान से अपना हाथ नहीं निकाल सकता हूँ।” आकाश ने परेशान स्वर में उत्तर दिया।
माँ घुटनों के बल बैठ गई और उसके हाथ की ओर देखा। फूलदान की गर्दन बहुत संकरी थी और आकाश का हाथ उस फूलदान के अंदर उसकी कलाई तक पूरी तरह से फँस गया था।
यह देखकर माँ को उसकी थोड़ी चिंता हुई और उन्होंने आकाश के पापा को पुकारा।
पापा ने आकर यह सब देखा। उन्होंने धीरे से आकाश का हाथ पकड़ा और फूलदान से उसका हाथ खींचने की कोशिश की, लेकिन फिर भी वह बाहर नहीं निकल पा रहा था।
अब उन्होंने साबुन के पानी से आकाश का हाथ ढीला करने की कोशिश की लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने कलाई के चारों ओर कुछ तेल का उपयोग करके उसका हाथ ढीला करने की कोशिश की, लेकिन हाथ फिर भी नहीं निकला।
सब कुछ आजमाने के बाद पिता एक पल के लिए ठहर गए, आकाश की कलाई और फूलदान को टटोल कर देखा और फिर कहा, “मैं तो हार मान रहा हूँ… अब तो जो भी मुझे यह बताएगा कि इस फूलदान से हाथ कैसे बाहर निकालें, मैं उसे 100 रुपये इनाम दूँगा।”
आकाश ने कहा, “सच्ची में पापा? आप 100 रुपये इनाम दोगे!”
तभी माँ और पापा दोनों ने एक खटपट की आवाज सुनी और देखा कि बच्चे का हाथ फूलदान से फिसल कर बाहर आ गया और यह देखकर दोनों ने राहत की साँस ली। अब माँ को तो बहुत आश्चर्य हुआ पर पिता मुस्कुराने लगे।
उस खटपट की आवाज का कारण जानने के लिए, माँ ने फूलदान को उल्टा किया तो उसमें से एक 10 रुपये का सिक्का नीचे गिरा। माँ चकित हो गई और पूछा, “आकाश यह क्या है?”
आकाश ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, “ओह! यह सिक्का कल पापा ने मुझे दिया था और मैंने इसके अंदर रख दिया। आज जब मैंने इसे बाहर निकालने की कोशिश की तो मेरा हाथ फँस गया। पर जब मैंने सुना कि पापा फूलदान से मेरा हाथ निकालने के लिए 100 रुपये देंगे, तो वह लेने के लिए मैंने सिक्का छोड़ दिया, जो मुठ्ठी मैं पकड़ रखा था…तो मेरा हाथ बाहर आ गया।”
माँ ने ज़ोर से हँसते हुए आकाश को गले लगा लिया और उसके पापा की ट्रिक को समझ गई…
दोस्तों छोटे से आकाश ने जीवन का बड़ा-सा रहस्य सुलझा दिया।
जीवन में हम जाने-अनजाने कितनी ही ऐसी चीजों को पकड़े रहते हैं, जिनकी वजह से हमारी चेतना उड़ान नहीं भर पाती। हमारी चेतना विस्तार पाना चाहती है, पर मन उन चीजों को छोड़ना नहीं चाहता। बस उस बच्चे के फँसे हुए हाथ की तरह हमारा जीवन एक संघर्ष बन जाता है और हम जीवन के वास्तविक लक्ष्य की ओर उड़ान नहीं भर पाते।
जीवन में उच्चतर लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई अनावश्यक चीजो को छोड़ना होगा।
“बंधन सामान्य इच्छाओं, पसंद और नापसंद से शुरू होते हैं और हमें नीचे खींचते हैं।”
दाजी









Leave a Reply