बोले बाबा का हुआ गौना, ऋणमुक्तेश्वर मंदिर से आई बारात-राम जानकी मंदिर से हुई मां गौरा की विदाई।।
काशी में बाबा के गौना के बाद हुई फुलों की होली।।
महमूरगंज काशी में मुरली मनोहर ने हजारों गोपीकाओं के साथ रचाया रास।।
रंगभरी एकादशी में आधी रात तक थिरकता रहा काशी।
संतोष त्रिपाठी संत जी
ब्यूरो चीफ वाराणसी
वाराणसी। कालिकापुराण के अनुसार बाबा ने राधा,गौरा ने कृष्ण के रूप में काशी में खेले होली। भगवतगीता के अनुसार मथुरा में फागुन पुर्णिमा के दिन एक हजार आठ गोपीकाओ के साथ रास रचाया, लगभग छः हजार वर्ष पूर्व मुरली मनोहर ने रंगभरी एकादशी से होली का उत्सव मनाया था,उसी परंपरा के अनुसार काशी में बाबा विश्वनाथ का गौना फागुन एकादशी के दिन हुआ था,आज शाम को श्रृणमूक्तेश्वर मंदिर से बारात गांजा बाजा से आई मां गौरा की विदाई पालकी में हुई कहारो ने पालकी लेकर आगे आगे चले बराती पीछे पीछे राम जानकी मंदिर पहुचे। बारात का स्वागत द्वार चार पचमेर मिठाई ठंडई से हुई दो घंटे पुजा पाठ के पश्चात बारात वापस गई। बारात आने के बाद प्रसिद्ध कलाकारो द्वारा प्रीतिभोज के अवसर पर नाट्य रूपांतरण से गीत संगीत फूलों की होली से पुरा शहर रंगमय हो गया। मंदिर के पुजारी दर्जनों पूरोहितो , कार्यकर्ता ओ भक्तों के द्वारा यह आयोजन आधी रात तक चला भक्तों ने खूब आनंद लिया।









Leave a Reply