भारत का यह कैसा लोकतंत्र जहाँ किसानों के अधिकारों से उन्हें किया जा रहा वंचित
तो फिर प्रशासन को किसानों की उपज ले जाने से स्ट्रांग रूम की सुरक्षा का महसूस हो रहा है खतरा
मंडी समिति ओसा के गेट पर बिचौलिए खरीद रहे हैं किसानों का 15 सौ रुपए कुंटल में धान
कौशांबी मंडी समिति ओसा व्यापारी और किसान परिसर है और यहीं पर हॉट शाखा और मंडी समिति शाखा द्वारा किसानों के धान खरीद के लिए खरीद केंद्र बनाया गया है 7 मार्च तक धान खरीद के लिए शासन ने निर्देश दिया है लेकिन फिर भी धान खरीद बहाने से बंद कर दी गई है और बिचौलियों के लिए केंद्रों में गुपचुप धान खरीदे जा रहे हैं व्यापारियों का यहां पर व्यापारी स्थल भी है
मंडी समिति के पीछे के हिस्से में विधानसभा चुनाव की मतगणना के लिए ईवीएम मशीन रख दी गई हैं लेकिन विधानसभा चुनाव को लेकर मंडी समिति ओसा परिसर के पीछे के क्षेत्र में ईवीएम मशीन रखने का स्थान बनाए जाने के बाद मंडी समिति के सुरक्षाकर्मियों ने व्यापारियों के प्रवेश पर तो रोक नहीं लगाई है लेकिन उपज लेकर पहुंचने वाले गरीब किसानों पर मंडी समित गेट पर रोक लगा दी गई है जबकि मंडी समिति परिसर में पूरे दिन सैकड़ों व्यापारी मौजूद है लेकिन फिर किसानों के पहुंचने में कैसा खतरा प्रशासन महसूस कर रहा है स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर मंडी समिति में किसानों को उपज लेकर प्रवेश पर गेट के सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोक लगा दी गई है जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत हो रही है इसका सीधा लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं और मंडी गेट पर 15 सो रुपए कुंतल किसानों का धान बिचौलिए खरीद रहे हैं
प्रशासन के इस निर्णय के बाद मजबूर किसान लूटे जा रहे हैं मंडी समिति गेट पर लगे सुरक्षाकर्मियों और खरीद केंद्र प्रभारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है धान खरीद अधिकारी जिला विपणन अधिकारी की भी भूमिका बिचौलियों को बढ़ाने वाली दिखाई पड़ रही है किसानों की उपज मंडी समिति के भीतर धान खरीद केंद्र तक ले जाने पर स्ट्रांग रूम की कड़ी सुरक्षा को अधिकारी कैसा खतरा महसूस कर रहे हैं यह जन चर्चा में शामिल है जबकि भारी भरकम अर्धसैनिक बल के जवानों की तैनाती स्ट्रांग रूम क्षेत्र में की गई है विधानसभा चुनाव मतगणना के बहाने मंडी समिति ओसा में किसानों की धान खरीद रोक दी गई उपज ले कर आने वाले किसानों को मंडी समिति के गेट से प्रवेश नहीं मिल रहा है जिससे किसान परेशान है गेट से लगातार किसान उपज सहित लौटाए जा रहे हैं किसानों की उपज की बिक्री में आने वाले व्यवधान को दूर करने के लिए कोई अधिकारी पीड़ित किसानों की सुनने को तैयार नहीं है यह कैसा लोकतंत्र है जहां किसानों को उनके अधिकारों से रोका जा रहा है









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