कविता
अभिवादन
शास्त्रों में बात है लिखी गई,
मानो इसको अनुशासन है।
बढ़ती सदैव नित चार चीजें,
करता जो नित अभिवादन है।।
अभिवादन से आयु बढ़ती,
बढ़ती नित विद्या बुद्धि भी।
यश,कीर्ति सहित बल बढ़ता है,
करता जो नित अभिवादन है।।
गुरु,मातु,पिता जी का वंदन,
करते थे श्रीराम सदा देखो।
है बात यह बीते युग की,
पर आज भी पूजे जाते हैं।।
आज समय है बदल गया,
सब भूल गए निज संस्कार।
हाय बाय के चक्कर में,
छा गया जीवन में अंधकार।।
नहीं अभी कुछ बिगड़ा है,
निज संस्कृति को अपनायें हम।
आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ,
निज धर्म की अलख जगायें हम।।
संकल्प सभी लें मिलकर के,
निज सभ्यता को हम अपनायेंगे।
आने वाली इस पीढ़ी को,
अभिवादन का पाठ पढ़ायेंगे।।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
ग्राम व पोस्ट खखैचा प्रतापपुर हंडिया प्रयागराज।
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871










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