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गहरी नींद की अवस्था में हमारे विचार

गहरी नींद की अवस्था में हमारे विचार ,हमारे subconscious mind (अवचेतन मन) में ,खेत में बोये बीजों की तरह छप जाते हैं और यही हमारी नियति का निर्माण करते हैं। हम रात को सोते समय, कौनसे विचारों को लेकर सो रहे हैं?

ज़िंदगी अच्छी है

प्रतिदिन जब हम सुबह जागते हैं, तो हमारे पास दो विकल्प होते हैं। या तो हम इस बात पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं कि हमारे जीवन में क्या गलत चल रहा है, या फिर हम अपना ध्यान अपने जीवन की सही या अच्छी बातों पर केंद्रित कर सकते हैं। आइए देखते हैं कि इस चुनाव का जीवन पर क्या प्रभाव हो सकता है…

बर्ट और जॉन जैकब्स, दो भाई, बोस्टन में एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में छह बच्चों में सबसे छोटे थे।

जब वे कॉलेज से स्नातक करके निकले, तब ना उनके पास पैसे थे और ना अनुभव । थी तो बस माँ की दी कुछ अच्छी सलाह।

उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया, जिसके लिए उन्होंने टी-शर्ट तैयार की और उन्हें बोस्टन की गलियों में एक पुरानी वैन से बेचना शुरू किया। पाँच साल तक वे अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए प्रयास करते रहे और यहाँ तक कि विभिन्न कॉलेजों में अपनी टी-शर्ट बेचने की कोशिश में इधर-उधर घूमते रहे। वे अपनी यात्रा के दौरान हर रात उस वैन में ही सोते।

अलग-अलग जगहों पर यात्रा करने से उनके पास बहुत सारे अनुभव थे और इस प्रकार उनकी सड़क पर कई बेहतरीन बातचीत होती। लेकिन एक वार्ता ऐसी थी जिसने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया – वह थी कि कैसे मीडिया हमारी संस्कृति को नकारात्मक सूचनाओं से भर देता है। ये हमेशा हमें यह बताता है कि दुनिया में क्या गलत हो रहा है, लेकिन ये शायद ही कभी बताता है कि दुनिया में क्या सही हो रहा है।

उस बातचीत के परिणामस्वरूप, उन्होंने फैसला किया कि उनकी टी-शर्ट केवल सकारात्मक संदेश देगी और इस तरह ‘लाइफ इज गुड’ ब्रांड का गठन हुआ। उन्होंने मुस्कुराते हुए चेहरे के मूल डिजाइन के साथ शुरुआत की और साथ में लिखा ‘लाइफ इज गुड’ (जीवन अच्छा है)। और आशावाद के इस सरल संदेश को सभी ने इस तरह अपना लिया, जैसा कि भाइयों ने कभी सोचा भी नहीं था। उनका व्यापार चल पड़ा और उनका जीवन भी। और यह आशावाद की शक्ति उनमें उस विश्वास के कारण थी, जो उन्होंने बचपन में अपनी माँ से सीखा था।

जब वे भाई प्राथमिक विद्यालय में थे, उनके माता-पिता, एक भयंकर कार दुर्घटना के शिकार हो गए थे जिसमें उनकी माँ कुछ टूटी हड्डियों के साथ बचने में सफल रही, लेकिन उनके पिता ने अपने दाहिने हाथ को खो दिया। इससे उनके पिताजी इतने तनाव और हताशा से भर गए कि उनका स्वभाव कठोर हो गया और वह अक्सर बहुत चिल्लाते थे।

उनके घर में जीवन निश्चित रूप से परिपूर्ण नहीं था और बहुत कठिन परिस्थितियाँ थीं। लेकिन उनकी माँ, ‘जोन’, अभी भी मानती थीं कि “जिंदगी अच्छी है।” इसलिए हर रात जब परिवार खाने की मेज पर बैठता, तो वह अपने छह बच्चों से कहती कि उस दिन उनके साथ जो कुछ अच्छा हुआ, वह बताएँ।

माँ के ये शब्द सरल जरूर थे, लेकिन वे क्षण-भर में कमरे की ऊर्जा ही बदल देते थे। वह सभी अपने दिन के सबसे अच्छे, सबसे मजेदार या सबसे विचित्र समय पर विचार कर रहे होते थे।

इस दैनिक अभ्यास ने उन्हें पीड़ित और उदास होने की ऐसी मानसिकता विकसित करने से रोका – “ओह, आप इस भयानक बात पर विश्वास नहीं करेंगे जो मेरे साथ आज हुआ।” शिक्षक या होमवर्क असाइनमेंट के बारे में शिकायत करने के बजाय, वह सहपाठी के बाल कटवाने की बेहूदा स्टाइल या स्कूल के किसी मजेदार प्रोजेक्ट के बारे में हँस रहे होते।

उनकी जैसी माँ के साथ पलना- बढ़ना, जो रसोई में गाना गाती, बहुत उत्साहपूर्वक कहानियाँ सुनाती और उनके लिए बच्चों की किताबों की कहानियों का अभिनय करती, चाहे वे किसी भी बुरी स्थिति से गुज़र रही होती – इस सब ने उन्हें एक महत्त्वपूर्ण सबक सिखाया, खुश रहना आपकी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं है।

भाइयों का कहना है कि, “उन्होंने (माँ ने) हमें दिखाया कि आशावाद, एक साहस भरा विकल्प है, जिसे आप हर दिन अपना सकते हैं, खासकर विपरीत परिस्थितियों में।”

वे आगे कहते हैं कि जीवन पर उनके अटूट सकारात्मक दृष्टिकोण ने ‘लाइफ इज़ गुड’ को प्रेरित किया – उनकी $ 100 मिलियन की कंपनी, जिसका मिशन आशावाद की शक्ति का प्रसार करना है।

जॉन और बर्ट, अब अपनी माँ की परंपरा को जारी रखते हैं और अपने कर्मचारियों से वही बात पूछते हैं, जब वे सभी एक साथ आते हैं – “चलो कुछ अच्छा बताओ” – और इसके परिणाम आश्चर्यजनक रहे हैं।

यह उन्हें उन विचारों की ओर ले जाता है, जो प्रगति की ओर जाते है। जो चुनौतियों पर रूके रहने के बजाय सफलताओं के निर्माण की ओर अग्रसर होते है।

इसे अपने घर या ऑफिस में आजमाएँ और फर्क देखें…

“अपने प्रतिदिन के विचारों से ही हम अपनी नियति का निर्माण करते हैं।”
दाजी

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