आज का प्रेरक विचार अंहकार
😇 अहंकारी की बहुत गहरी चेष्टा यह होती है कि दूसरे उसे सम्मान दे, अहंकारी को इससे बल मिलता है कि लोग जाने कि वह भी कुछ है, उसका सारा ज़ोर इसी बात पर होता है 😇
😇अहंकारी यानी, अहंकार से भरा व्यक्ति ओर अहंकार यानि बेहोशी, जिसे अपना कुछ भी पता नहीं, जो स्वयं से बहुत दूर है, जिसे स्वयं का कोई सम्मान नहीं, जिसे स्वयं का कोई सम्मान नहीं वही दूसरों से सम्मान चाहता है…. बहुत गहरे में कोई भी किसी दूसरे को सम्मान नहीं देना चाहता, कोई भी छोटा नहीं होना चाहता, यदि सम्मान देगा भी, तो उसके बदले कुछ न कुछ चाहेगा, मुफ़्त में तो क़तई नहीं देगा, यदि सम्मान के बदले में उसे कुछ न मिल पाया, तो वो उसके प्रति द्वेष से भरेगा, जब भी मौक़ा मिलेगा, वो निश्चित रूप से अपमान करेगा ही 😇
तो पहला कदम है अपने अंदर की इस बुराई की जानकारी होना और साथ ही साथ मानना, की मैं अहंकारी हूँ।
यह हुआ पहला कदम निरहंकार होना।
यह पहला कदम हुआ, संस्कारी होना।
यह पहला कदम हुआ, प्रेम से ओतप्रोत होने का।
जो डर गया वो कभी भीतर नही जा पाया









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