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Maharashtra: महुआ से बनी Wine को बाजार में बेचने की “अनुमति दे सरकार, BJP विधायक की डिमांड”

[जनमीडिया टीवी]
[महाराष्ट्र: स्टोरी हाइलाइट्स]

Maharashtra: महुआ से बनी Wine को बाजार में बेचने की “अनुमति दे सरकार, BJP विधायक की डिमांड”
“महाराष्ट्र में बीजेपी के विधायक (BJP MLA Maharashtra) किसन कथोरे ने कहा कि सरकार महुआ से बनी वाइन को खुले बाजार में बेचने की परमिशन दे. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से आदिवासियों को रोजगार मिलेगा, उनका जीवनस्तर सुधरेगा. विधायक ने कहा कि सरकार इसकी अनुमति दे, ताकि लोग सड़कों पर चाय पीने की बजाय महुआ से बनी वाइन खरीदना शुरू कर दें.

BJP विधायक ने मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री को लिखा पत्र’महुआ से बनी वाइन की गुणवत्ता अंगूर से बेहतर’
राज्य सरकार को महुआ के फूलों से बनी वाइन की खुले बाजार में बिक्री की अनुमति देनी चाहिए. इससे आदिवासियों और कातकरी बंधुओं को भरपूर रोजगार मिलेगा. भाजपा विधायक (BJP MLA Maharashtra) किसन कथोरे ने भी खुले बाजार में शराब बेचने के राज्य सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि लोग सड़कों पर चाय पीने की बजाय महुआ के फूलों से बनी वाइन (Wine made from mahua flowers) पिएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया, क्योंकि सरकार को नहीं पता था कि लोगों को किस दिशा में ले जाना है.
महाराष्ट्र (Maharashtra) में पिछले चार-छह दिनों से राज्य में एक अहम मुद्दा बना हुआ है कि वाइन (Wine) किसानों के लिए है. अगर वाइन को खुले बाजार में बेचने की इजाजत दी जाती है तो किसानों के वास्तविक हित में यह सरकार काम कर रही है. इसका स्वागत है. 

“सरकार को पत्र लिखकर विधायक ने की है मांग”

BJP विधायक ने कहा कि मैंने पत्र लिखकर सरकार से मांग की है कि यदि खुले बाजार में अंगूर से बनी वाइन को बेचने की अनुमति दी जा रही है तो महुआ की वाइन को भी अनुमति दी जाए. क्योंकि आदिवासियों के खेत में महुआ से बनी वाइन की गुणवत्ता अंगूर से बनी वाइन की तुलना में बेहतर है. आयुर्वेदिक भी है. उन्होंने कहा कि इसे शोध द्वारा भी दर्जा दिया जा सकता है.

‘लोगों को किस दिशा में ले जाना है, सरकार को नहीं पता’

भाजपा विधायक किसन कथोरे ने कहा कि यदि आप अंगूर उत्पादकों को न्याय देना चाहते हैं तो महाविकास अघाड़ी सरकार से अनुरोध है कि खुले बाजार में महुआ वाइन बेचने की अनुमति दे, ताकि लोग सड़कों पर चाय पीने की बजाय महुआ के फूल की वाइन पीना शुरू कर दें. दरअसल, ऐसे फैसले इसलिए किए जाते हैं, क्योंकि सरकार को यह नहीं पता होता है कि लोगों को किस दिशा में ले जाना है.

तरंग सिंह
[प्रेस रिपोर्टर जनमीडिया टीवी]

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