पुण्यतिथि पर याद किए गए जनेश्वर।
छोटे लोहिया के कृतित्व का कोई
सानी नहीं=अशोक
करछना। अपने अनूठे कृतित्व और व्यक्तित्व के चलते देश के राजनयिकों में एक अलग छवि
रखने वाले छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र से आज के दौर में राजनीति करने वाले नए लोगों को प्रेरणा लेने की जरूरत है। सामाजिक समरसता की अपनी अद्भुत सोच और चिंतन को लेकर सदैव गरीबों, मजलूमों, जरूरतमंदों समाज के उपेक्षित वर्गों, और गांधी लोहिया के अंतिम व्यक्ति के लिए संघर्षरत रहे। जनेश्वर के राजनीति में आने से उनकी नहीं बल्कि राजनीतिक की ही शोभा बढी़।यह बातें छोटेलोहिया की पुण्यतिथि पर चर्चित हास्य कवि अशोक बेशरम ने कही। भीरपुर में आयोजित एक स्मृति सभा के दौरान उन्होंने जननायक को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा की महलों से हंसी ठिठोली कर जब झोपड़ियां बतलाएंगी,सच कहता हूं छोटे लोहिया तब याद तुम्हारी आएगी।स्मृति सभा में मौजूद लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि वह सदैव वाद और वर्ग के अपवादों से ऊपर उठकर कई बार केंद्रीय मंत्री रहने के बावजूद किसी भी तरह के स्वार्थ,दम्भऔर द्वेष से दूर रहे।वर्तमान में भटकते राजनैतिक संदर्भों को लेकर राजनीति में आए नए लोगों को ऐसे नेता से कई सबक और प्रेरणा लेने की जरूरत है। इस दौरान कई क्षेत्रीय प्रबुद्धजन और समाजसेवी मौजूद रहे।
पुण्यतिथि पर याद किए गए जनेश्वर।छोटे लोहिया के कृतित्व का कोईसानी नहीं=अशोक










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