जल्द ही मध्यप्रदेश के इस धाम में मिलेगी शिर्डी जैसी सुविधा, टापू पर बसा है मंदिर
इंदिरा सागर बांध की हजारों वर्ग किलोमीटर चौड़ी झील में टापू पर बसे संत सिंगाजी महाराज के समाधि स्थल को शिर्डी के साईं बाबा स्थान की तरह विकसित किया जाएगा.
खंडवा: इंदिरा सागर बांध की हजारों वर्ग किलोमीटर चौड़ी झील में टापू पर बसे संत सिंगाजी महाराज के समाधि स्थल को शिर्डी के साईं बाबा स्थान की तरह विकसित किया जाएगा. यहां श्रद्धालुओं के रुकने, स्नान के घाट, टीन शेड, गार्डन तैयार किया जाएगा. इसे संवारने का जिम्मा मप्र सरकार व मप्र टूरिज्म बोर्ड भोपाल ने उठाया है. यहां पहले चरण में सवा करोड़ रुपए की लागत से होने वाले कार्य का शनिवार को मांधाता विधायक नारायण पटेल ने भूमिपूजन किया.
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ये व्यवस्थाएं की जाएगी
यहां राज्य सरकार मप्र टूरिज्म विभाग के माध्यम से 3 हजार वर्गफीट क्षेत्र में भवन बनाएगी. यहां पर्यटकों को ठहरने, चाय-नाश्ता व भोजन की व्यवस्था रहेगी. पेयजल की समस्या न हो इसके लिए पानी की टंकी वाटर कूलर के साथ बनाई जा रही है. खास बात यह है कि महेश्वर, ओंकारेश्वर, उज्जैन की तर्ज पर यहां छोटे-छोटे घाट बनाए जाएंगे, ताकि यहां लोग स्नान कर सकें.
भीड़ नियंत्रित करने एक और रोड
संत सिंगाजी समाधि स्थल पर एकमात्र एप्रोच रोड है. यहां पर मेला, गुरु पूर्णिमा या संत जन्मोत्सव के दौरान मंदिर परिसर स्थल पर भारी भीड़ रहती है. दो पहिया, चार पहिया वाहन आते हैं. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यहां पर एक और एप्रोच रोड बनाया जाएगा, प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार यह मार्ग सवा दस करोड़ रुपए से बनेगा.
पर्यटन की दृष्टि से आकर्षक
संत सिंगाजी महाराज न केवल निमाड़ क्षेत्र के बल्कि मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और गुजरात क्षेत्र के पशु पालक किसानों के पूज्यनीय संत माने जाते हैं. लगभग 500 साल पहले बोरखेड़ा गांव में वह समाधिलीन हुए थे. इंदिरा सागर बांध बनने के कारण उनका यह समाधि स्थल डूब में आ गया था. लोगों की आस्था को देखते हुए तत्कालीन उमा भारती सरकार ने हजारों डंपर मिट्टी डालकर इस समाधि स्थल को उसी स्थान से ऊपर उठा दिया. तभी से सिंगाजी महाराज का समाधि स्थल इंदिरा सागर बांध की झील के बीचो बीच दिखाई देता है. चारों तरफ अथाह सागर के बीच यह धार्मिक स्थान ना केवल धर्म की दृष्टि से बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत आकर्षक है.
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पशुधन के लिए लोग आते है
बता दें कि संत सिंगाजी महाराज निमाड़ के प्रसिद्ध संत थे. मूल रूप से वह पशु प्रेमी संत थे और ऐसी आस्था है कि जो भी किसान यहां आते हैं उसके खेत खलिहान में पशुओं की कोई कमी नहीं रहती. यही कारण है कि संत सिंगाजी महाराज की समाधि पर देशभर के किसान अपने पशुओं की लंबी उम्र की कामना करने के लिए आते हैं. यहां किसान अपने पशुओं के दूध से निर्मित शुद्ध देसी घी का भोग लगाते हैं. पूरे देश में संभवत यही एक मात्र स्थान है जहां किसान अपने पशुओं की लंबी उम्र की कामना के लिए आते हैं.









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