भीख मांगे जो अदाकारी से,बच के रहना तुम उस भिखारी से।
हीरक जयंती समारोह में कवियों ने बाधीं समां।
करछना। जसरा स्थित छेदीलाल इंटर कॉलेज के विशाल सभागार में आयोजित हीरक जयंती समारोह के दौरान मंच पर पहुंचे कवियों ने खूब समां बांधी। पंडित राम लखन शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए चर्चित हास्य कवि अशोक बेशरम ने लोगों को जी भर गुदगुदाया। भीख मांगे जो अदाकारी से,बच के रहना तुम उस भिखारी से,आंख में गर बसा सोने का हिरण,फिर तो धोखा है ब्रह्मचारी से। इसके अलावा सामाजिक विसंगतियों और सियासी गलियारों को छूते छंद मुक्तकों के अनूठे हास्य-व्यंग्य शब्द रंग पर खूब तालियां बटोरी। गीतकार जितेंद्र शैलेश की वाणी वंदना के साथ शुरू हुए कवि सम्मेलन में रामलोचन सांवरिया, वीरेंद्र कुसुमाकर,मखदूम फूलपुरी,संतोष शुक्ल समर्थ, मुरादअली मुराद, कृष्णकांत कामिल,सबरेज इलाहाबादी,बेचन विनोदी,अमरनाथ अमर की रचनाएं भी खूब सराही गयी। संयोजक कभी शिक्षक लखन प्रतापगढ़ी की रचनाओं ने भी खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के उपरांत मंच पर विद्यालय के प्रबंधक बाबू विश्वनाथ ने सभी कवियों का सारस्वत सम्मान किया।प्रधानाचार्य योगेंद्र सिंह ने सभी कवियों और अतीत जनों के प्रति स्वागत आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर अजय भारतीया,सोभनाथ शुक्ल,लल्लू त्रिपाठी,सतेन्द्र सिंह,बब्बन सिंह,सतीश केसरवानी,विजय चितौरी,अनुज त्रिपाठी समेत विद्यालय के शिक्षक और बच्चे मौजूद रहे।
भीख मांगे जो अदाकारी से,बच के रहना तुम उस भिखारी से।










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