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महाकुंभ के पूर्व प्रयाग सर्किट के तहत आस्था केन्द्रों का अलंकरण जरूरी: डॉ.भगवत

महाकुंभ के पूर्व प्रयाग सर्किट के तहत आस्था केन्द्रों का अलंकरण जरूरी: डॉ.भगवत
यमुनापार के कई पौराणिक स्थल भी पर्यटकों के लिए बनेंगे आकर्षण केन्द्र:
करछना। कोहणार स्टेट किला जो टोंस नदी के किनारे पर स्थित जीर्ण अवस्था में है पावन प्रयाग की महिमा और प्रतिवर्ष गंगा यमुना की रेती में आयोजित माघ मेले के दौरान बिना आमंत्रण के करोड़ों लोग संगम में डुबकी लगाने पहुंचते हैं।अपनी पंंचकोशी और चौरासी कोसी परिक्रमा की मान्यताओं के अनुरूप आगामी महाकुंभ के पूर्व यदि इनआस्था के केन्द्रों का जीर्णोद्धार और अलंकरण करा कर प्रयाग सर्किट से जोड़ दिया जाय तो इससे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ साथ स्थानीय विकास,सरकारी आय और रोजगार को भी गति मिलेगी।यह बातें क्षेत्र के रामपुर में आयोजित जागृति मिशन की बैठक के दौरान मिशन के संयोजक डॉ.भगवत पांडेय ने कही। उन्होंने कहा कि इस परिक्षेत्र के एक ओर जहां पश्चिम में अरैल त्रिवेणी पुष्प और पूर्व में विंध्याचल मुख्य द्वार के रूप में विद्यमान हैं वहीं उत्तर भाग में गंगा -तमसा और दक्षिणी परिक्षेत्र में यमुना और विंध्य पहाड़ी की वादियों के बीच कई अतीत के प्रतीक रामायण और महाभारत कालीन स्थल मौजूद हैं।बैठक में मुख्य वक्ता औरअध्यक्षता कर रहे जबलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष रहे राष्ट्रपति पदक से सम्मानित मिशन के संरक्षक प्रो.रहस बिहारी द्विवेदी ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग अपनी पावन महिमा के साथ विश्वमानवमूल्य संसाधन केंद्र के रूप में जग विदित है।यहां पवित्र बेनी माधव मंदिर,चक्र माधव, गदा माधव,सोमेश्वर धाम,मनकामेश्वर धाम जैसे तीर्थ आस्था के आकर्षण हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत प्रवक्ता डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने कहा कि यमुनापार क्षेत्र के शंकरगढ़,बारा स्थित पौराणिक मनकामेश्वर धाम लालापुर,अमिलियन देवी,सुजावन देव,भीटा,गढ़वा का किला, मौजूद है।वहीं नैनी क्षेत्र में सोमेश्वर नाथ,प्रभु जी की बैठक,सच्चा आश्रम,चक्र माधव, गदा माधव,समोगर नाथ धाम जैसे पवित्र स्थल हैं।करछना में गंगा-तमसा तट स्थित महर्षि बाल्मीकि रचना प्रेरणा स्थली,कुशगढ़ महादेव मंदिर,सिरसा स्थित श्रीनाथ मंदिर,परानीपुर बाबा महाराज धाम,पगला आश्रम,रामनगर देवी धाम,बरसैता किला,पहड़ी महादेव मंदिर के साथ-साथ माण्डा स्थित मांण्डवी देवी ,महाभारत कालीन बोलन धाम,जैसे कई अति प्राचीन स्थल लोगों में अपनी सनातन मान्यताओं को लेकर आस्था के केंद्र के रूप में मौजूद हैं। वक्ताओं ने कहा कि इसके अलावा भी प्रयाग के समीपस्थ ककरा में महर्षि दुर्वासा आश्रम,पडि़लन महादेव मंदिर,कड़ा धाम जैसे केंद्रों का भी अलंकरण कर प्रयाग सर्किट से जोड़ दिया जाए और शासन स्तर से यहां पहुंचने के लिए वाहनों की भी सुविधा प्रदान की जाए तो यह केंद्र आगामी महाकुंभ के पूर्व प्रयाग आने वाले, तीर्थयात्रियों,पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार और सरकारी आए बढ़ाने में सहयोगी सिद्ध होंगे। बैठक में तीर्थराज पांडेय,मनीष तिवारी,रामलोचन सांवरिया,डॉ.राजेंद्र शुक्ल,मानिक चन्द्र ओझा,जीतेंद्र जलज,अशोक बेशरम,राजमणि चौधरी,अतुल तिवारी,विजयपाल,कमला शंकर त्रिपाठी,संतोष शुक्ला समर्थ,रिंकू सिंह,वेद श्रीवास्तव,मोहनलाल पाण्डेय,डॉ.वीरेंद्र कुसुमाकर,श्यामलाल बेगाना,रामबाबू यादव,समेत कई कवि कलाकार समाजसेवी एवं प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।

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