होली पर्व पर विशेष
होली जैसा उत्सव पृथ्वी पर खोजने से भी नहीं मिलेगा। रंग गुलाल है,आनंद उत्सव है तल्लीनता का,मदहोशी का,मस्ती का,नृत्य का बड़ा सत्संगी उत्सव है। हँसी के फव्वारों का,उल्लास का महोत्सव है।ऐसा नृत्य करता उत्सव पृथ्वी पर कही भी नहीं है |
अपने व्यक्तित्व की पिचकारी से सब पर स्नेह,प्रेम,भाव का पक्का रंग फैला दिया जाय।
होली का स्लोगन यही कहता है न कि “बुरा न मानो होली है”।
तो बस कभी किसी का बुरा न मानकर सबसे जुड़कर रहिये।
चाहे सोशल मीडिया के माध्यम से ही उन लोगों को अवश्य अबीर गुलाल लगाओ स्नेह का टीका करो,बधाई दो जिनसे रिश्ता टूट गया है या जिनसे दिल की दूरी हो गई है या जिनसे नहीं बनती या जिनके लिये गलत विचार आते हैं।
खुशियों से भरे नित आपकी झोली,
बधाई हो आपको रंग-बिरंगी होली।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”










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