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श्री सम्मेद शिखरजी जैन तीर्थंकरों की मोक्ष स्थली को पर्यटन स्थल ना बनायें – रेवती रमण सिंह


श्री सम्मेद शिखरजी जैन तीर्थंकरों की मोक्ष स्थली को पर्यटन स्थल ना बनायें – रेवती रमण सिंह
आज देशभर के जैन समुदाय के लोग आक्रोशित मण्डलायुक्त को ज्ञापन
प्रयागराज 21 दिसंबर।पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने प्रयागराज मण्डलायुक्त कार्यालय पर उपस्थित हजारों की संख्या में जैन समाज के लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि26 मार्च 2022 को विश्व जैन संगठन ने जंतर मंतर दिल्ली में प्रदर्शन किया ,तब यह प्रकरण जानकारी में आया और जैन धर्मावलंबियों की भावनाओं को समझते हुए और प्रकरण की गंभीरता को जानते हुए हमने 29 मार्च को राज्यसभा में यह प्रकरण उठाया गया था कि सर्वोच्च जैन तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी को इको सेंसिटिव जोन में घोषित कर वहाँ गैर धार्मिक गतिविधियों और पर्यावरण पर्यटन की अनुमति देने हेतु वर्ष 2018-19 मे झारखण्ड सरकार द्वारा अनुसंशा किये जाने पर केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा 2 अगस्त 2019 को अधिसूचना क्रमांक 2795 (अ) जारी की गयी जिससे पूरे जैन समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और वह आक्रोशित है।
विश्व जैन संगठन के आह्वान पर आज पूरा देश का जैन समाज आंदोलनरत है।
जैन समाज इसलिए भी आशंकित है और साथ ही भयभीत व आक्रोशित भी है क्योंकि अब से लगभग 20 वर्ष पूर्व जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की मोक्ष स्थली गिरनार पर्वत जो कि गुजरात के जूनागढ़ में स्थित है को भी जैन पूजन व जैन समाज के वंदना के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।वहां नेमिनाथ भगवान के चरण चिन्हों को हटाकर मूर्ति स्थापित कर अतिक्रमण किया गया ।उन्होंने कहा कि वहां जैन यात्रियों को जैन धर्म की जय बोलने पर या जैन पद्धति अनुसार पूजन अर्चन करने पर मारपीट गाली-गलौज की जाती है ।यहां तक की जैन मुनि प्रबल सागर जी महाराज पर भी चाकुओं से जानलेवा हमला किया गया जिसके निशान आज तक मौजूद है। पूर्व सपा प्रदेश प्रवक्ता विनय कुशवाहा ने कहा कि सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने भारत सरकार से मांग किया कि जैन धर्म के सर्वोच्च आस्था के केंद्र श्री सम्मेद शिखर जी की व उसकी स्वतंत्र पहचान बरकरार रखें और साथ ही सरकार से यह भी मांग करता हूं कि जैनियों को गिरनार पर्वत पर भी उनका अधिकार वापस मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंदीय वन मंत्रालय विश्व जैन संगठन की 17 मार्च 2022 को भेजी गयी मांगो पर उक्त अधिसूचना में संशोधन करे ताकि जैन तीर्थ की पवित्रता व स्वतंत्र पहचान बनायें रखे।

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