पढ़ने से पहले…धीरे से अपनी आँखें बंद करे…हृदय पर ध्यान लाए…और एक सूक्ष्म सुझाव ले कि हमारा हृदय पूर्ण रूप से ईश्वरीय प्रेम, विश्वास और भक्ति से भर चुका है।
किसान और उसकी बेटियाँ
एक गाँव में एक किसान रहता था जिसकी दो बेटियाँ थीं। किसान की बड़ी बेटी की शादी एक किसान से और छोटी की शादी कुम्हार से हुई थी।
शादी के बाद वह अपनी बेटियों का हाल जानने के लिए उनके पास जाता रहता था।
एक बार जब किसान अपनी बड़ी बेटी से मिलने गया, तो उससे अच्छी बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना करने का अनुरोध किया क्योंकि उस वर्ष बारिश फसल के लिए पर्याप्त नहीं थी।
घर पहुँचने के बाद किसान ने अच्छी बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना की। भगवान ने किसान की प्रार्थना सुन ली और उस दिन अच्छी बारिश हो गई।
अगले दिन किसान अपनी छोटी बेटी से मिलने गया। जब वह अपनी छोटी बेटी से मिला तो उसने देखा कि वह उदास है और जब किसान ने उसका कारण पूछा तो उसने कहा, “पिछली रात की बारिश के कारण, उनके सभी बर्तन, जो अभी भी गीले थे, वे खराब हो गए और आज बेचने के लिए उनके पास कोई बर्तन नहीं हैं!”
उसने अपने पिता से अधिक धूप और बारिश न होने के लिए प्रार्थना करने का अनुरोध किया क्योंकि बर्तन की मिट्टी के सख्त होना धूप पर निर्भर करता है।
अब बेचारा किसान असमंजस में था। उसकी दोनों बेटियाँ उसे परस्पर विरोधी प्रार्थनाओं के लिए अनुरोध कर रही थीं। वह तय नहीं कर पा रहा था कि वह किसके लिए प्रार्थना करे!
वह उनमें से किसी एक को नहीं चुन सकता था क्योंकि वह अपनी दोनों बेटियों को समान रूप से प्यार करता था।
वह जानता था कि अगर वह अच्छी बारिश के लिए प्रार्थना करेगा तो उसकी छोटी बेटी का काम प्रभावित होगा और अगर वह धूप के लिए प्रार्थना करेगा तो उसकी बड़ी बेटी का काम प्रभावित होगा।
अंत में उसने अपना मन बनाया और प्रार्थना की, “भगवान जैसा आप चाहते हैं वैसा ही करें! आपकी इच्छा प्रबल हो!”
“हमें सदैव केवल सर्वशक्तिमान एवं सर्वदृष्टा सर्वोत्तम मालिक की प्रार्थना, अपने मन को उसके प्रति प्रेम एवं विनय में पूर्णरूपेण डुबोकर तथा अपने को भी सर्वथा भुलाकर, करनी चाहिए। यही प्रार्थना करने का सही तरीका जो शायद ही कभी निष्फल होता हो।”
बाबूजी









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