जयंती विशेष: वो दौर था, वो समाजवादी थे और मुलायम ने समाजवाद को जीया था
साल था 1978 और मौका मुलायम सिंह यादव के भाई की शादी का था। तब मुलायम सहकारिता मंत्री थे। उनके मित्र रामफल वाल्मीकि के कई साथी संकोच में खड़े थे कि कैसे सबके साथ बैठें। नजारा देख मुलायम माजरा समझ गए। तब कुरीतियों के चलते वाल्मीकि समाज को अछूत माना जाता था। मुलायम बोले रामफल ये लोग उधर क्यों खड़े हैं। सबको पंगत के साथ बैठाकर खाना खिलाओ। नेताजी की इस पहल से ये कुप्रथा सैफई से हमेशा के लिए खत्म हो गई।










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