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अपनी लोक परम्परा और शहीदों की सोच को सहेज रहा महोत्सव:विनोदानंद

अपनी लोक परम्परा और शहीदों की सोच को सहेज रहा महोत्सव:विनोदानंद
शहीद पत्नी द्वारा पूजन दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ:
मिश्र बंधु और मोहिनी श्रीवास्तव के गीतों ने बांधी समां:
बनारसी और दल के सपेरा नृत्य पर झूमे श्रोता:
उद्घाटन के बाद रामकथा का हुआ शुभारंभ
करछना। जमुनापार महोत्सव अपने अतीत की थाती अपनी लोक परंपरा और अमर शहीदों की सोच को सहेज रहा है। महापुरुषों का समर्पण और उनकी स्मृतियां जीवंत करने वालेआजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित इस बार का 24 वां जमुनापार महोत्सव हमें अपनी भारत माता के प्रति जान गवाने वाले अमर शहीद और सेनानियों से प्रेरणा लेने का पथ प्रशस्त करेगा।दिव्य और भव्य आयोजन की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। यह बातें प्रयाग पीठ से पधारे प्रसिद्ध राम कथा वाचक स्वामी विनोदानन्द जी महाराज ने रामपुर स्थित बृजमंगल सिंह इंटर कॉलेज परिसर में 24 वें जमुनापार महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर कही। इसके पूर्व जमुनापार के अमरशहीद गिरीश शुक्ल की धर्मपत्नी कविता देवी ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। मंच पर विराजमान पूज्य संतों और लोक कलाकारों का स्वागत करते हुए महोत्सव के संयोजक डॉ भगवत पांडेय ने कहा कि महोत्सव एक ही प्रीति रीति और नीति का प्रतिदर्श है विगत कई वर्षों से अपनी माटी परिपाटी और राष्ट्र के अमर सपूतों की सोच को सहेज रहा महोत्सव अपने शहीद सेनानियों के प्रति कृतज्ञ है जागृति मिशन की यह परंपराअनवरत बनी रहेगी। वेद पाठी बटुकों द्वारा शंखध्वनि और वेद मंत्रोच्चार के साथ महोत्सव का आगाज हुआ।इसके पूर्व विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सरस्वती वंदना नृत्य के बाद चर्चित सूफी भजन गायक मिश्र बंधु जुड़वा द्वारा प्रस्तुत गीत रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने वही ये सृष्टि चला रहे हैं और यह देश है वीर जवानों का अलबेलों का मस्तानों का सुनकर श्रोताओं ने भारत माता के जयकारे से पंण्डाल को गुंजायमान कर दिया। मोहिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत गीत केवट ने कहा राम जी से उतराई ना लूंगा हे भगवन,भी खूब सराहा गया। बनारसी और दल के लोक कलाकारों ने उद्घाटन समारोह में सपेरा नृत्य प्रस्तुत करते हुए चार चांद लगा दिए। सच्चा आश्रम के स्वामी दिव्यानंद जी ने भी महोत्सव की सराहना करते हुए इसे जमुनापार की अनमोल थाती बताया तो वहीं मंच पर वृंदावन से पधारे स्वामी गोपाल जी महाराज और मिर्जापुर से पधारे कथावाचक आचार्य पंकज जी महाराज ने आजादी के मर्म को समझाते हुए रामचरितमानस के कई उदाहरण प्रस्तुत कर अपने देश और स्वाभिमान पर आगे बढ़ने के लिए श्रोताओं को प्रेरित किया। भव्य उद्घाटन समारोह का संचालन वरिष्ठ गीतकार राजेंद्र शुक्ला ने किया। इस मौके पर संत प्रसाद पांडेय,दिनेश तिवारी,केसी मिश्रा,रिंकू सिंह,वेद श्रीवास्तव,मोहन जी पांडेय,शोभनाथ द्विवेदीअमित पांडेय,श्यामलाल बेगाना,रामलोचन सांवरिया, मानिकचंद,रामबाबू यादव,डॉ.दिनेश सोनी सबरेज अहमद,कमला शंकर त्रिपाठी,जितेंद्र जलज, संतोष शुक्ला समर्थ,अशोक विश्वकर्मा,तीरथराज पांडेय, अतुल तिवारी,आनंद तिवारी विशाल चौबे,त्रिभुवन नाथ गौड़
समेत विद्यालय के शिक्षक,छात्र और बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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