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मन की बात पर विशेष—एक कवि के मन की बात मोदी जी से

मन की बात पर विशेष—
एक कवि के मन की बात मोदी जी से

मोदी जी के मन की बात आज तक सुनते सुनते।
मुझे भी मोदी जी से मन की बात कहने का मन हुआ।
तो कह रहा हूं अपने मन की बात मोदी जी।
कृपया सुनिए ध्यान लगाई मन से मोदी जी।।
अभी तक जो भी हुआ कार्य आपके द्वारा।
वह बहुत ही सराहनीय एवं सुन्दर कार्य है।।
बढ़ रहा विश्व पटल पर भारत का मान है।
सभी भारतीय कहते पीएम मेरा अभिमान है।।
आपके द्वारा किए जा रहे काम सभी निराले हैं।
फिर भी हम सब कविजन कुछ कहने वाले हैं।।
धरती का स्वर्ग पी.ओ.के. का सपना बाकी है।
अभी भी अंग्रेजों के तर्ज पर चल रही खाकी है।।
हैं जो घर में गद्दार उनका चेहरा जब सामने आएगा।
तभी कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हो पाएगा।।
देववाणी संस्कृत का उत्थान अभी भी बाकी है।
हिंदी का राष्ट्रभाषा बनना अभी भी बाकी है।।
अभी रुपया का डाॅलर की बराबरी करना बाकी है।
प्रतिभावान युवाओं का पलायन रोकना बाकी है।।
छोटे एवं मझोले व्यवसाई बेमौत मर रहे हैं।
मोदी जी इनकी सुधि लेना अभी भी बाकी है।।
एससी एसटी कानून से बहुत हो रही नाइंसाफी है।
ऐसे अंधे कानूनों का हटाया जाना अभी बाकी है।।
आरक्षण मिले उसे ही जिसे आवश्यकता है।
जाति आधारित आरक्षण को भी हटाना बाकी है।।
शिक्षा नीति बने एक सी सबके बच्चे पढ़ें सरकारी में।
निजी स्कूलों,कालेजों का नामों निशान मिटाना बाकी है।।
कहने को तो बहुत अभी है कितना कहूं मैं।
इतना समझ लीजिए कि भ्रष्टाचार मिटाना बाकी है।।
आप हैं प्रतिभावान ईश्वरांश अवतारी।
हाथ जोड़ विनती यही उक्त बातें लो स्वीकारी।।

आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
खखैचा प्रतापपुर हंडिया प्रयागराज उत्तर प्रदेश।

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