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स्वमूल्यांकन

स्वमूल्यांकन

हम खुद को कैसे परखें, ताकि हर पल बेहतर बनते जाए?

स्वमूल्यांकन

लगभग 18 साल का एक लड़का एक दवा की दुकान पर गया और दुकानदार से एक फ़ोन करने की इजाज़त माँगी। उस दुकानदार ने फ़ोन करने की इजाजत दे दी। फिर उसने एक नंबर डायल किया और बात करने लगा।

लड़का,” हेलो मैम, क्या आप मुझे अपना लॉन काटने का काम दे सकती हैं?”

महिला (कॉल के दूसरे छोर पर), “क्षमा करें, लेकिन मेरे पास यह काम करने के लिए पहले से ही कोई है।”

लड़का, “मैम प्लीज् एक बार मेरा काम देख ले, आप को बहुत अच्छा लगेगा।”

महिला, “पर मुझे उसकी जरूरत नही है!”

लड़का, “मैम, आप इस समय काम करने वाले को जितनी पगार देते हैं, मैं उसकी आधी पगार पर यह काम कर लूँगा।”

महिला, “नहीं, मैं उस व्यक्ति के काम से संतुष्ट हूँ, जो इस समय मेरे बगीचे की देखभाल कर रहा है।”

लड़का, “मैम, प्लीज मुझे नौकरी दे दो। मैं आपके फुटपाथ पर झाड़ू भी लगा दूँगा। पाम बीच में आपके पास सबसे सुंदर लॉन होगा।”

महिला, “नहीं, धन्यवाद।”

चेहरे पर मुस्कान के साथ लड़के ने रिसीवर रख दिया। दवा की दुकान का मालिक, जो यह सब सुन रहा था, लड़के के पास आया और बोला, “बेटा, मुझे तुम्हारा रवैया और सकारात्मक भावना बहुत पसंद आई और लगता है तुम्हे नौकरी की बहुत जरूरत है। तुम चाहो तो मैं तुमको मेरे यहाँ नौकरी पर रख सकता हूँ।”

लड़के ने जवाब दिया, “नहीं सर, धन्यवाद।”

दुकान के मालिक ने भ्रमित होकर पूछा, “लेकिन अभी तो तुम कॉल पर नौकरी के लिए इतनी विनती कर रहे थे।”

लड़के ने (मुस्कुराते हुए) जवाब दिया, “नहीं सर, मुझे वास्तव में नौकरी की ज़रूरत नहीं है। मैं अपनी मौजूदा नौकरी में अपने प्रदर्शन का मूल्यांकन कर रहा था। वास्तव में मैं ही उस महिला, जिससे मैं बात कर रहा था, के लिए काम करता हूँ।”

ये कहकर वह लड़का मुस्कराता हुआ वहाँ से चल दिया और वह दुकानदार उसे आश्चर्य से देखता ही रहा!

हमें हम से बेहतर कोई नही जान सकता। अगर हर पल हमारी निगाह खुद पर है, तो हमारी कमियाँ हमसे छुप नही सकती। और हमें हर पल हम से ही बेहतर इंसान बनने से कोई रोक नही सकता।

किसी भी क्षेत्र में सफलता की जिम्मेदारी स्वयं पर होती है। सतर्क रहें, अपने प्रति अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहें।
दाजी

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