वैसे तो प्रयागराज की तुलना “इलाहाबाद” शब्द से करना अपने आप में ही इस दिव्य धरा का अपमान स्वरूप है-एस एन त्रिपाठी
प्रयागराज Vs इलाहाबाद
वैसे तो प्रयागराज की तुलना “इलाहाबाद” शब्द से करना अपने आप में ही इस दिव्य धरा का अपमान स्वरूप है, परंतु कुछ तथाकथित पंथ निरपेक्षता और जातगत राजनीत के वाहकों द्वारा नाम बदलने पर आपत्ति जताने के बाद थोड़ा स्पष्टीकरण देना पड़ेगा। नीचे का पूरा स्पष्टीकरण उन्ही लोगों के लिये है………..
अब लो मेरी सुनिये-
👉🏿 ब्रम्हा ने धरती के सृजन से पहले यज्ञ प्रयागराज में किया ना कि इलाहाबाद में
👉🏿 काशी के बाद प्रयागराज ही धरती पर दूसरा नगर था, ना कि इलाहाबाद ।
👉🏿 प्रयागराज में वैदिकता बसती है,
👉🏿 प्रयागराज में मुनियों की तपस्या बसती है,
👉🏿 जो सभ्यता लेखकों और कवियों ने सीखा वो भी प्रयागराज की वैदिक संस्कृति के चलते सीखा।
👉🏿 बजरंगबली विश्राम करने प्रयागराज आये थे ना कि इलाहाबाद,
👉🏿 तीनों नदियों का संगम प्रयागराज में हुआ था और त्रिवेणी कहलाया था ना कि इलाहाबाद ।
👉🏿 गंगाजमुनी संस्कृति भी तभी बनी जब गंगा जमुना का संगम हुआ और वो भी प्रयागराज में ही हुआ था ना कि इलाहाबाद में
👉🏿 श्री रामचन्द्र जी राजा दशरथ की अस्थि विसर्जित करने प्रयागराज आये थे ना कि इलाहाबाद में
👉🏿 निषादराजगुह की कथा भी प्रयागराज की है ना कि इलाहाबाद की,
👉🏿 अमृत कलश प्रयागराज में छलका था ना कि इलाहाबाद में,
👉🏿 नाग वासुकी प्रयागराज में आये थे ना कि इलाहाबाद में
👉🏿 वेणी माधव प्रयागराज आये थे ना कि इलाहाबाद में
👉🏿 माँ_आलोपशंकरी प्रयागराज में प्रकट हुईं थी ना कि इलाहाबाद में,
👉🏿 पांडवों ने शिव की अर्चना प्रयागराज में की थी ना कि इलाहाबाद में।
👉🏿 भारद्वाज मुनि की तपस्या भी प्रयागराज में ही हुई थी ना कि इलाहाबाद में।
👉🏿 यहाँ तक कि तुम्हारे चचा अकबर का मन भी मोहित हुआ था प्रयागराज पे ही, ना कि इलाहाबाद पे वो भौतिकता जिस पर पूरी मुगल हुक़ूमत का मन ललचाया था वो भी प्रयागराज ही था ।
👉🏿 और आज भी हर वर्ष 2 करोड़ लोग अौर हर 6 वर्ष पे 5 करोंड़ लोग कुंभ में मेरे प्रयागराज के दर्शन करने आते हैं ना कि तुम्हारे इलाहाबाद के।
👉🏿 आज भी दक्षिण भारत में लोग इस नगर को प्रयागराज के नाम से ही संबोधित करते हैं, ना कि इलाहाबाद के नाम से ।
वो तो बड़ी नीचता थी मुग़लो की जो वैदिक प्रयागराज के इतिहास को नष्ट करने के लिये नाम ही परिवर्तित कर दिया, पर एक युग पुरूष ने 440 साल बाद फिर से वो वैदिकता लौटाने का प्रयास किया, नमन है उस युग पुरूष को।
श्री योगी आदित्यनाथ जी को शत् शत् नमन बार बार नमन् ।
इतना काफी है प्रयागराज के अस्तित्व को समझने के लिये या और कुछ और इतिहास खोलूं।
🕉जय हो प्रयागराज की🕉










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