क्या हमारी अंतरात्मा हमसे कभी कुछ कहती है?
एक मुलाकात खुद से
एक मार्मिक कहानी! हरेकला हजब्बा के बारे में। शायद किसी ने कभी पहले यह नाम नहीं सुना होगा। मैंने गुगल किया और विकिपीडिया सहित उनके बारे में कई संदर्भ प्राप्त किए।
एक बहुत बड़े औद्योगिक ने अपने जीवन की तुलना एक फल बेचने वाले, हरेकला हजब्बा से की है। ये उद्योगपति जो दुनिया में चार सेमीकंडक्टर कंपनियों के मालिक हैं और एक कुलीन उद्योगपति है और जिन्होंने आईआईटी चेन्नई से स्नातक और यूएसए से एमएस किया है। उन्होंने दिल को छू लेने वाला एक आत्मनिरीक्षण लेख लिखा हैं। आइए हम भी इस प्यारे से लेख को पढ़ते है:-
“सज्जनों, जब से मैंने हरेकला हजब्बा के बारे में ट्वीट देखा, तब से मुझे बहुत अजीब और असहज महसूस हो रहा है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि वह क्या है, जिसने मेरी नींद उड़ा दी है? मैं जो सोच रहा हूँ और जो भी मेरे भीतर चल रहा है, उसे किसी को शेयर करने के लिए मैं सवेरे 5:30 बजे उठ गया। पर मेरी पत्नी घर पर नहीं है, और मेरे पिताजी और बेटी गहरी नींद में हैं। मैं आप में से किसी को भी सुबह 5:45 बजे कॉल नहीं कर सकता। इसलिए, मैंने सोचा कि जो जो भी मेरे दिमाग में आ रहा है, मैं वह टाइप करता रहूँ।
हरेकला हजब्बा क्या कर रहे है, इसकी गहराई में जाने के बाद, मैं उनके बारे मे जो पता लगा सका, वह है:-
वे मैंगलोर के एक फल विक्रेता है। उन्होंने पैसे कमाने और परिवार के खर्चो में योगदान करने के लिए कम उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था। वह 65 वर्ष के हैं। और रोजाना करीब 100-150 रुपये कमाते हैं। वे 5 लोगों के परिवार का भरण पोषण कर रहे थे।
उन्होंने अपने गाँव में अपने साथी ग्रामीणों और एक स्थानीय मदरसे की मदद से, फल बेचकर होने वाली आय से पैसे बचाकर, अपने गाँव में एक स्कूल बनवाया। और 8 नवंबर 2020 को उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
संक्षेप में यह उनका बायोडाटा है। यह बिल्कुल भी प्रभावशाली नहीं लगता। शीर्ष स्तरीय भारतीय विश्वविद्यालयों या IV लीग यूएस स्कूलों से कोई फैंसी डिग्री नहीं, कोई प्रौद्योगिकी दवा, निवेश बैंकिंग, उद्यम पूंजी अनुभव नहीं। उन्होंने बैंकों से पैसा नहीं उठाया है। कौन हैं वे सज्जन, जिन्होंने मेरी नींद उड़ा दी है?
दूसरी तरफ, मैं बहुत भाग्यशाली हूँ, जिसका एक खुशहाल परिवार है। मैंने, पैसों से क्या खरीद सकते है उसका जीवन मे बहुत अच्छे से अनुभव किया है। एक ऐसा विवरण (resume) जिस पर मुझे गर्व हो सकता है और जो मुझे अति अहंकारी बना सकता है। ब्लू चिप कंपनियों के लिए मैंने काम किया है। अत्यंत प्रभावशाली विचारों, मौजूदा स्टार्टअप, भारतीय मानक के अनुसार कुलीन जीवन शैली के लिए, बहुत सारे प्यारे दोस्त आदि के लिए शीर्ष स्तरीय उद्यम पूंजी कोष से धन जुटाया है। यह सभी तरह से बहुत अधिक है।
लेकिन, अगर मैं सिर्फ एक कदम पीछे हटता हूँ और हरेकला हजब्बा के विवरण और मेरे विवरण की तुलना करता हूँ, तो मुझे लगता है कि मेरा विवरण कुछ भी लायक है या नहीं ?
एक व्यक्ति जो प्रतिदिन 100-150 रुपये कमाता है, जिस पर घर के 5 लोगों के भरण पोषण की जिम्मेदारी होते हुए भी पैसे बचा-बचा कर स्कूल बनवाया। कितना बड़ा लक्ष्य!!!!
हम उन्हें ले जाते हुए कोई मर्सिडीज, पोर्शे, बीएमडब्ल्यू या कोई अन्य बड़ी कार नहीं देख सकते हैं। न ही कोई लुइस वुइटन या राल्फ लॉरेन उसे लपेटे हुए हैं और न ही उन्हें आश्रय देने के लिए कोई बड़ा घर। फिर भी, उन्होंने यथास्थिति को चुनौती दी है। और उन्होंने इतनी कम आय के साथ एक स्कूल का निर्माण किया। इतना ऊँचा लक्ष्य !!!!
लेकिन मेरे जैसा कम नश्वर, जो इतना भाग्यशाली इंसान है, वह कुछ भी सार्थक नहीं कर रहा है। हमारे दोनों के विवरण की तुलना करने मात्र से मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही है। मेरा इतना अव्यवस्थित, जटिल और ऐसी चीजों से भरा हुआ जीवन जिसका किसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। मुझमे इतना अहंकार है, मैं अपने आस-पास के कई लोगों के साथ बहुत ही उदासीन तरीके से व्यवहार करता हूँ। मैं कभी-कभी कमियों के लिए शिकायत करता हूँ।
यह सब मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या मेरे जीवन की कोई कीमत है? मैं इस ग्रह पर अपना समय इतने व्यर्थ तरीके से क्यों बिता रहा हूँ? मैं हरेकला हजब्बा से कई गुना ज्यादा पैसा कमाता हूँ। पर क्या इसका कोई आंतरिक मूल्य है?
मुझे उम्मीद है कि हम किसी दिन इन सवालों के जवाब खोजना शुरू कर देंगे। काश, सर्वशक्तिमान मुझे ऐसा करने की बुद्धि दे।
मुझे लगता है कि मेरी अंतरात्मा मुझे कभी-कभी कचोटती रहती है। लेकिन, हरेकला हजब्बा के संक्षिप्त विवरण ने असर दिखाना शुरू कर दिया है।
मैं प्रसिद्ध कन्नड़ कवि डॉ.जी.एस. शिवरुद्रप्पा के निम्नलिखित शब्दों के साथ संक्षेप मे कहना चाहूँगा कि-
“कुछ लोग अपने लिए जीते हैं…
कुछ लोग अपने शौक के लिए जीते हैं…
और ज्यादातर लोग नहीं जानते कि वे किस लिए जीते हैं.
“अंतरात्मा और कुछ नहीं बल्कि अंदर की आवाज़ है।”
चारीजी










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