शिक्षा,संस्कार और सेहत से समझौता नहीःडॉ.पाण्डेय
जनहित अस्पताल के सभागार मे विश्व महिला दिवस पर सगोष्ठी का आयोजन-
करछना।घर-घर की उजियारी नारी सदैव से ही समाज में पूजित रही है।किन्तु देवी,लक्ष्मी जैसी मान्यताओं के अलावा नारी भी एक इंसान हैं और उसकी अपनी समस्याओ और जरूरते हैं।इसे लेकर स्वयं शिक्षा,संस्कार और सेहत के प्रति सचेत रहे और कोई समझौता न करें।जिसके चलते स्वयं,घर,समाज और देश के निर्माण में ही नारियां अपना बेहतर सहयोग दे सकती हैं।यह बातें रामपुर स्थित लोक मंगल संस्थान के सभागार में विश्व महिला दिवस पर आयोजित संगोष्ठी,नारी घर-घर की उजियारी विषय पर बोलती संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.व्यंजना पाण्डेय ने कही। उन्होने कहा आज की बालिका भी कल की नारी है और दो-दो घर परिवारों की आंकाक्षाओं को संजोकर परिवार को आगे बढ़ाती हैं।इसके लिए खुद उसके अच्छे सेहत के अलावा उसे शिक्षित होकर संस्कार को संजोने की जरूरत है। जिससे आगे चलकर वह अपने अधिकार और कर्तव्यों के प्रति समर्पित होकर एक अच्छी इंसान बन सके।संगोष्ठी के दौरान कवि राम लोचन सांवरियां,बीरेन्द्र कुसुमाकर,सबरेज इलाहाबादी,और जितेन्द्र जलज ने भी अपनी पंक्तियों में नारी का गुणगान करते समाज में नारी की भूमिका को अहम बताया।लोक गायिका मोहिनी श्रीवास्तव ने फाग और चैता गीतों के माध्यम से महिलाओं को अपनी परंपरा के प्रति सजग किया तो वही हास्य कवि अशोक बेशरम ने अपने खेतो सिवानो और घर आंगन मे अम्मा,दादी,नानी द्वारा गाये जाने वाले जंतसार,परभाती,निरवही,लगवही,सोहर जैसे संस्कार और पारंपरिक गीतों की बानगी देते हुए सहेजने पर जोर दिया।डॉ.भगवत पाण्डेय ने संगोष्ठी में मौजूद महिलाओं के प्रति स्वागत आभार प्रकट करते हुए नये संकल्प के साथ समाज में आगे बढ़ने की बात कही। संचालन कवि राजेन्द्र शुक्ल ने किया।इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रही।












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