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नोट की गड्डी मिलते ही अपने ही पैमाइश से मुकर गया लेखपाल

नोट की गड्डी मिलते ही अपने ही पैमाइश से मुकर गया लेखपाल

मामूली सा कर्मचारी लेखपाल अपने को मुख्यमंत्री और राज्यपाल से कम नहीं समझता है लेखपाल की रिपोर्ट के आगे डीएम कमिश्नर भी मांगने लगते हैं पनाह

कौशांबी जमीन की नाप करने के मामले में लेखपालों ने इसे व्यवसाय बना लिया है जिससे गांव में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है जमीनी मामले में पुलिस भी राजस्व का मामला कहकर पल्ला झाड़ लेती है जिससे कमजोर मजलूम लोगों को राजस्व से न्याय मिलता नहीं दिख रहा है और राजस्व से न्याय न मिलने पर पुलिस भी असहाय हो जाती है मामूली सा कर्मचारी लेखपाल अपने को मुख्यमंत्री और राज्यपाल से कम नहीं समझता है लेखपाल की रिपोर्ट के आगे डीएम कमिश्नर भी पनाह मांगने लगते हैं जिससे आम जनता परेशान हैं लेकिन धना दोहन कर बार-बार गरीबों को परेशान करने वाले लेखपाल के कारनामे पर आला अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है और आए दिन विवाद भी होते हैं लेकिन विवाद को बढ़ने के बाद भी लेखपालों के कारनामों पर कठोर कार्यवाही नहीं हो पाती है आखिर कब तक राजस्व के मामले में लेखपाल की मनमानी चलती रहेगी यह पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है ताजा मामला मंझनपुर तहसील क्षेत्र के मवई गांव का है

जानकारी के मुताबिक मंझनपुर तहसील क्षेत्र के मवई गांव निवासी दलित मोतीलाल पुत्र ननका का मकान गांव की आबादी में पूर्वजों के जमाने से बना है जिस पर मोतीलाल और उनके परिवार निवास करते हैं उनके जमीन के बगल में फुर्ती लाल पुत्र राम विशाल की भूमिधरी कृषि जमीन है इस जमीन से भैया लाल पुत्र रामनाथ में जमीन का एक हिस्सा खरीद लिया है जमीन खरीद करने के बाद भैयालाल ने अपनी जमीन की पैमाइश की बात कही जिस पर तहसील के अधिकारियों के निर्देश पर लेखपाल ने जमीन की पैमाइश कर दी और भैया लाल को फुर्तीलाल की जमीन पर काबिज करा दिया लेखपाल की पैमाइश के बाद मोतीलाल का मकान जहां बना हुआ था लेखपाल की पैमाइश के बाद मोती लाल का मकान सही साबित हुआ लेकिन फिर भी जमीन खरीद दार भैयालाल ने दोबारा पैमाइश कराने की बात कही और लेखपाल ने बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के दोबारा जमीन की पैमाइश शुरू कर दी मौके पर नजरी नक्शा अभिलेख कुछ भी मौजूद नहीं था बिना आदेश के दोबारा पैमाइश का ग्रामीणों ने विरोध किया लेकिन लेखपाल तो बड़े दबाव में था उसे मोटी रकम मिल चुकी थी जिससे लेखपाल मनमानी पर उतारू था मनमानी तरीके से लेखपाल ने दोबारा जमीन की नाप कर आबादी की जमीन में काबिज मोती लाल को गलत साबित कर भैयालाल की जमीन आबादी में साबित कर दी और अपने पहले की पैमाइश को लेखपाल ने गलत करार दिया अब सवाल उठता है कि लेखपाल ने पहले गलत पैमाइश की थी तो उसे अधिकारियों ने निलंबित क्यों नहीं किया और दोबारा लेखपाल ने गलत पैमाइश की है तो उसे निलंबित किया जाना चाहिए लेकिन लेखपाल के दो बार में दो अलग अलग पैमाइश के मामले को अधिकारियों ने अभी तक गंभीरता से नहीं लिया है लेखपाल के इस कारनामे से गांव में विवाद की स्थिति है पीड़ित दलित मोतीलाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर दोषी लेखपाल को दंडित किए जाने की मांग के साथ-साथ आबादी की भूमि पर भैया लाल के निर्माण पर रोक लगाए जाने की मांग की है जिलाधिकारी ने कोतवाल सराय अकिल को निर्देशित किया कि मौके की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करें

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