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MNIT के निदेशक प्रो , रमाशंकर वर्मा बने

MNIT के निदेशक प्रो , रमाशंकर वर्मा बने
देश का प्रतिष्ठित मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद प्रयागराज में नए निदेशक प्रोफेसर रमाशंकर वर्मा ने सरस्वती पूजन के साथ कार्यभार ग्रहण किया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर रमाशंकर वर्मा को संस्थान का नया निदेशक नियुक्त किया है।
प्रोफेसर रमाशंकर वर्मा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा छात्र है। 1978 में झांसी के एमएलबी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत थे इसके बाद 1984 में पुर्तगाल और फिर 1985 में जेएनयू में साइंटिस्ट पूल अफसर के पद पर रहे है। 1986 से 1997 तक वह अमेरिका के नामी संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किये। इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय आ गए। जुलाई 1999 में वह फिर अमेरिका चले गए वहां मार्च 2000 तक रहे इसके बाद अहमदाबाद, पुणे मे भी रहे। इसके बाद जुलाई 2004 में आईआईटी मद्रास मे जैव प्रौद्योगिकी विभाग में नियुक्त हुए।
नवनियुक्त निदेशक प्रोफेसर रमाशंकर वर्मा ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद वीडियो से मुखातिब होने के बाद उन्होंने बताया कि सबसे पहले उनकी प्राथमिकता होगी कि संस्था को किस प्रकार से खोला जाए और सबसे पहले उन छात्रों को संस्था में बुलाया जाए जिनके अंतिम वर्ष की परीक्षाएं या तो बाकी है । सभी पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के छात्रों को पहले बुलाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी ताकि उन से शिक्षण कार्य करा कर उनको समाज में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शित करने का मौका मिले। इसके अलावा की छात्रों को संस्था में ही कार्यभार ग्रहण करने की व्यवस्था की जाए ताकि उनके द्वारा इस संस्था से जो अनुभव प्राप्त हुआ है वह आने वाली नवागत छात्रों को दे सके तथा एक सफल और व्यवस्थित समाज को बनाने में मदद कर सके।

उन्होंने संस्थान के अंदर हुए विशिष्ट अविष्कारों को पेटेंट कराने की बात कही उन्होंने कहा कि इस प्रकार से जो छात्र यहां पर रहकर अपने अनुसंधान के समय जो नवीनतम आविष्कार करते हैं और जिन अविष्कारों से समाज का भला हो सके उनको उन्हीं के नाम से पेटेंट कराना जरूरी है ताकि उनके अविष्कारों का इस्तेमाल समाज को और अधिक शोध एवं विकसित बनाने में किया जा सके। आविष्कारों के विषय में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले करोना काल में जहां एक और संस्थान ने कई आविष्कार किए वहीं सौर ऊर्जा एवं प्रदूषण रहित ऊर्जा को विकसित कर सके इसके लिए नए पाठ्यक्रमों को लाया जाएगा तथा अगले तीन से 5 वर्षों के अंदर इन पाठ्यक्रमों पर विस्तृत अध्ययन शुरू कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरीके से विदेशों में टेस्ला जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा विद्युत उपकरण से संचालित नवीनतम वाहनों का इस्तेमाल करना शुरू किया गया है ऐसी तकनीक सस्ते एवं किफायती दरों पर भारत में तैयार हो इसके लिए भी मोतीलाल नेहरू कॉलेज के छात्रों को अध्ययन एवं आविष्कार के लिए उचित संसाधन मुहैया कराने की व्यवस्था करना अपना लक्ष्य मानते हैं।

बायो रिसर्च पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां संभावनाएं सबसे अधिक है क्योंकि जिस तरीके से देश ही नहीं पूरा विश्व को रोना के संक्रमण से जूझ रहा है मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बायो केमिस्ट्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि इस संक्रमण से बचने एवं आम जनमानस को सुरक्षित रखने के लिए सस्ते से सस्ते दर पर वैक्सीन उपलब्ध हो सके और वह वैक्सीन कारगर हो यह भी आवश्यक है। पिछले करोना काल में मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कॉलेज में बायो केमिस्ट्री क्षेत्र में कई अविष्कार किए गए जो केंद्र सरकार को मुफ्त में आम जनमानस के सुरक्षित जीवन के लिए यहां के छात्रों ने समर्पित कर दिया और इन अनुसंधान ने न केवल अपने आविष्कार को सिद्ध भी किया है बल्कि इसकी सहायता से लाखों लोगों की जान भी बचाई जा रही है।

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