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दौड़ क्या हम हर पल खुद को दूसरों से बेहतर बनाने के लिए दौड़ कर रहे है?

दौड़
क्या हम हर पल खुद को दूसरों से बेहतर बनाने के लिए दौड़ कर रहे है?

दौड़

एक छोटी सी बात, पर है बड़ी खास!

एक बार एक चिड़ियाघर में कुत्तों और चीते की दौड़ रखी गई। इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना था कि उनमें से कौन सबसे तेज दौड़ता है।

बहुत लोगों की भीड़ जमा थी, इस दौड को देखने के लिए। थोड़ी देर में दौड़ शुरू हो गई।

सभी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि जब दौड़ शुरू हुई तो सभी कुत्ते तेजी से दौड़ने लगे, पर चीता अपनी जगह से हिला तक नहीं।

वहाँ की टीम के द्वारा बहुत कोशिश की गई, पर चीता तो अपनी जगह से हिला ही नहीं, जैसे वह इस रेस का हिस्सा था ही नहीं।

चीते को क्या हो गया, यह जानने के लिए लोग बड़े उत्सुक थे। तभी वहाँ एक बुजुर्ग ने मुस्कराते हुए जोर से कहा, “ये चीता नहीं दौड़ेगा!!”

सभी लोगो ने इसका कारण जानने के लिए उस बुजुर्ग को चारो ओर से घेर लिया।

“आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?” भीड़ ने फिर पूछा।

उन सज्जन पुरुष ने मुस्कराकर कहा,
“क्या सच में चीते को खुद को बेहतर साबित करने की जरूरत है।”

“चीता अपनी गति का प्रयोग शिकार करने के लिए करता है, कुत्तों के सामने यह साबित करने के लिए नहीं कि वह तेज और ताकतवर है।”

जीवन एक दौड़ नहीं है; हमें कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है।

स्वयं को साबित करना यह संकेत देता है कि हम अपनी क्षमता के लिए पर्याप्त रूप से आश्वस्त नहीं हैं और केवल अन्य लोगों के सामने स्वयं को साबित करना चाहते हैं।

अगर हम अपना जीवन दूसरों के सामने खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश में बिता रहे हैं, तो हम वास्तव में उन राहों पर दौड़ रहे हैं, जो कभी मंजिल तक नहीं पहुँचती।

जो खुद को खुद से हर दिन बेहतर बना रहा है वह सही राह पर है, बाकी सभी गुमराह है।

“उच्चतम आध्यात्मिक उपलब्धियों को प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण कारक अपनी क्षमता में आत्म-विश्वास है।”
बाबूजी महाराज

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