प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ द्वारा माघ मेला,परेड ग्राउंड स्थित शिविर परिसर में गणतंत्र दिवस पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मंच पर मौजूद नामचीन कवियों और कवयित्रियों द्वारा प्रस्तुत कविता के शब्द रंगों से जहां श्रोता एक ओर सराबोर हुए तो वहीं सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर तंज कसती रचनाओं ने जोरदार ठहाके के बीच लोगों को सोचने के लिए मजबूर किया। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि रहे तहसीलदार ओम प्रकाश शुक्ल औरअध्यक्षता वरिष्ठ लोककवि लाल जी देहाती ने किया। वन्दना शुक्ला द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना के उपरांत मंच का संचालन कर रहे चर्चित हास्य कवि अशोक बेशरम ने कहा, हमारा राष्ट्रगौरवऔर येअभिमान की गाथा,युगों तक रहेगी जिन्दा अमर बलिदान की गाथा।। गीतकार जीतेंद्र जलज ने पढ़ा, अपनी जमुना रहे अपनी गंगा रहे। हम रहें ना रहें,ये तिरंगा रहे।। वरिष्ठ कवि शैलेंद्र मधुर ने तिरंगे के दर्द को कुछ इस प्रकार बयां किया,हम हैं सीने पर गोलियां खाते,हम तिरंगे का दर्द जीते हैं। मखदूम फूलपुरी ने पढ़ा,किसानों के ही बेटे सरहदों पर जान देते हैं, बड़े लोगअपने बेटों को कहां फौजी बनाते हैं। प्रियंका शुक्ला ने अपने श्रृंगार गीतों में वीरों के बसन्त का बखान किया तो वहीं बिहारी लाल अंबर की हास्य व्यंग्य रचनाओं पर जमकर ठहाके लगे। मिर्जापुर के शिवम् श्रीवास्तव ओम के बाद संयोजक हास्य कवि नजर इलाहाबादी ने पढ़ा,अगर दो शब्द ही कोई कहे लिखने को मुझसे तो,तिरंगा अपना प्यारा और अपना हिंदुस्तान लिखूंगा। संघ के अध्यक्ष राजकुमार सागर द्वारा मंच पर सभी कवियों का सारस्वत सम्मान किया गया। इस मौके पर विकास सिंह,राजेंद्र शुक्ला,अवनीश पांडे रामचन्द्र,आशीष मिश्र,दिवाकर प्रसाद समेत बड़ी संख्या में लेखपाल गण और श्रोता मौजूद रहे।
युगों तक रहेगी जिन्दा,अमर बलिदान की गाथा।










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