शुक्लाम्बरा मां पुस्तक धारणी
देश धर्म पर बलि हो जाऊं
मां अंधियारे को भगाओ
तेरी करुणा से हम सुख पाये
शुक्लाम्बरा मां पुस्तक धारणी।
कलुषित हृदय को धुल दो मां
हम जड़मति तुम ज्योति स्वरूपा
शुचि भावों से तुमकों पूजूं
शुक्लाम्बरा मां पुस्तक धारणी।
मां भर दो हमें ज्ञान से
विद्या बुद्धि का दान दो
तेरी शरण में नतमस्तक है
शुक्लाम्बरा मां पुस्तक धारणी।
सद् मार्ग मां हमें बताओ
दो सुमति मां विद्या रुपा
पावन कर दो पतित पावनी
शुक्लाम्बरा मां पुस्तक धारणी।
कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रुद्रप्रयाग उत्तराखंड









Leave a Reply