. गुरु पर भरोसा
एक दिन आंटी को (किसी धार्मिक स्थल से) सेवा का हुकुम आया आंटी सेवा में चली गयी ।
थोड़ी देर बाद आंटी को फ़ोन आया की
उसके बेटे का ऐक्सिडेंट हो गया
वो आंटी गुरु जी से आज्ञा लेकर हॉस्पिटल पहुँची ।
आंटी ने सिमरन किया गुरुजी के आगे अरदास की और अपने बेटे की संभाल में लगी रही ।
आंटी की पड़ोसन जो उनकी दोस्त भी थी
बोली बहन तेरे गुरु जी कैसे है
तू दिन रात सेवा में लगी रहती है और
उन्होंने तेरे साथ क्या किया……
तेरे बेटे का ऐक्सिडेंट हो गया ।
वो आंटी बोली मुझे तो अपने गुरुजी पर पूरा भरोसा है।
वो जो करते है बिल्कुल सही करते हैं
इसमें भी कोई राज की बात होगी
मेरे गुरुजी किसी का बुरा नही करते
जो होता है अच्छा ही होता है ।
कुछ दिनो बाद बच्चा ठीक हो गया ।
आंटी फिर से सेवा में लग गयी।
फिर कुछ दिन बाद पता चला की बेटे का फिर ऐक्सिडेंट हो गया है…..
अब पड़ोसन फिर कहने लगी
बहन तुझे तेरे गुरु ने क्या दिया
तो आंटी बोली कुछ घटनाएँ हमारी
परीक्षा के लिए भी होती हैं।
ज़रुर मेरे गुरुजी मुझे कुछ समझाना चाहते हैं।
मैं नही डोलूंगी ।
आंटी सिमरन करती रही गुरुजी के सामने अरदास विनती करती रही……
धीरे धीरे बेटा फिर ठीक हो गया ।
अब बेटे का तीसरी बार फिर ऐक्सिडेंट हो गया
तो पड़ोसन बोली बहन तू नही मानेगी
तू मुझे अपने बेटे की कुंडली दे
मैं अपने महाराज को दिखाऊँगी
आंटी बोली ठीक है
तू भी अपने मन की तसल्ली कर ले
लेकिन मेरा विश्वास नही डोलेगा
मेरे गुरुजी सब ठीक कर देंगे ।
अब पड़ोसन कुंडली लेकर अपने पंडित के पास गयी
और बोली महाराज इस बच्चे का बार बार ऐक्सिडेंट हो जाता है कुछ उपाय बताइए ।
महाराज बोले ये क्या ले आयी बहन, जिस किसी की भी ये कुंडली है
वो तो कई साल पहले मर चुका है
तो बहन बोली नही महाराज
मेरी सहेली का बेटा है और अभी ज़िंदा है
पर बार बार चोट लग जाती है ।
पंडित जी बोले जो भी है…..
उसकी मृत्यु कई साल पहले हो जानी चाहिए थी
जरुर कोई शक्ति है जो उसे बचा लेती है। वो बहन की आँखें भर आईं
दौडी दौड़ी उस आंटी के पास आकर चरणो में गिर गयी
बोली बहन मुझे भी अपने गुरुजी के पास ले चल ।
पूछने पर सारी बात बताई ।
और फिर बहन ने भी गुरु जी की शरण ले ली और सेवा करने लगी।
कहने का भाव ये है कि
हमारा विश्वास कभी नही डोलना चाहिए।
गुरुजी हर पल हमारी रक्षा करते है l












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