महोत्सव मंच कवियो ने बाधी समा,प्रवाचको ने प्रवाहित की मानस ज्ञान गंगा-
वाद विवाद प्रतियोगिता मे अव्वल रही श्रद्दा-
करछना।क्षेत्र के रामपुर स्थित बृजमंगल सिंह इंटर कालेज के परिसर में आयोजित 24वें पांच दिवसीय जमुनापार महोत्सव के चौथे दिन मंच पर वाद-विवाद प्रतियोगिता और विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। गुरू शिष्य परंपरा और आभाषीय शिक्षण व्यवस्था नामक विषय पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में कई स्कूल के बच्चे प्रतिभागी रहे।आयोजक कालेज की श्रद्धा शुक्ला ने 18 अंक अर्जिक कर पहला स्थान प्राप्त किया।छेदीलाल इंटर कालेज जसरा के प्रियांशू शुक्ला को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। श्लोक द्धिवेदी और खुशबू पाण्डेय ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।इसके उपरांत छंदकार फतेबहादुर रिषीराज की अध्यक्षता और शैलेन्द्र मधुर के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन में लालजी देहाती,नजर इलाहाबादी,धन्नजय शाश्वत,सुशील शुक्ल हर्ष,लखन प्रतापगढ़ी,कृष्णाकांत कामिल,संजय पाण्डेय सरस,सबरेज इलाहाबादी,जितेन्द्र जलज,बबलू सिंह बहियारी ने अपने छंद मुक्तक औऱ कविताओं से खूब समां बांधी।दूसरे सत्र में मंच पर आयोजित रामकथा के दौरान वृदावन से आई मानस प्रावाचिका साक्षी देवी ने कहा कि जग में सुंदर है दो नाम,चाहे कृष्ण कहे या राम।प्रावाचिका ने ईश्वर के सगुण रूप धारी श्रीराम और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अद्भुत वर्णन करते हुए श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।इसके बाद आचार्य गोपाल जी महाराज ने राधाकृष्ण प्रेम की अनूठी झांकी प्रस्तुत करते हुए इसे प्रेम की पराकाष्ठा बताया।उन्होने कहा इस कथा का रसपान करने वाले मनुष्यों के जीवन में निर्दोष और विवेकपूर्ण प्रेम का संचार होता है।पंकज जी महराज ने मानस में हनुमान जी भूमिका और मां सीता द्वारा उन्हे अजरता,अमरता और गुणनिधि होने के वरदान की कथा प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।इसके बाद मंच पर पहुंचे स्वामी विनोदानंद जी महाराज ने मानस के धनुष यज्ञ प्रसंग और राम विवाह की कथा सुनाया। तात जनक तनया यह सोई,धनुष यज्ञ जेहि कारन होइ के माध्यम से अद्भुत झांकी प्रस्तुत करते हुए खूब चतालियां बटोरी।संयोजक डॉ.भगवत पाण्डेय ने संतो औऱ कवियों की सराहना करते हुए कहा कि यह विभूतिया सदैव से हमारे समाज का पथ प्रदर्शक रहीं है। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से हास्य कवि अशोक बेशरम और राजेन्द्र शुक्ल ने किया।इस मौके पर शोभ नारायण द्धिवेदी,केसी मिश्रा,भोगाही सिंह,राजेन्द्र पाण्डेय,विनय सिंह बिन्नू,केशव विश्वकर्मा,सुनील प्रजापति,डॉ.दिनेश सोनी,कमला शंकर तिवारी,बृजेश द्धिवेदी,उमाशंकर पाण्डेय,शोभनाथ द्धिवेदी सहित बड़ी संख्य़ा में श्रोतागण मौजूद रहे।
महोत्सव मंच कवियो ने बाधी समा,प्रवाचको ने प्रवाहित की मानस ज्ञान गंगा-












Leave a Reply