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बेटियां प्यार है दुलार है घर का श्रृंगार है।

बेटियां प्यार है दुलार है घर का श्रृंगार है।

संतोष त्रिपाठी संत जी
साहित्यकार
राज्यपाल पुरस्कृत

काशी।
बेटीया प्यार है दुलार है घर का श्रृंगार है।
नेह देती हैं प्यार देती हैं।
सच में खुशियां अपार देती हैं।
बेटियां हैं जो बड़ों के सिर का,
सब शनिश्चर उतार देती हैं।

उत्तर भारत का ढेढ़िया एक विलुप्त हो रहा लोक नृत्य है। जिसका चलन आज भी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में मुख्य रूप से वाराणसी प्रयागराज कौशांबी और कानपुर में है। आज के दिन बेटियां एक जालीदार कच्ची मिट्टी के बर्तन में दीप जलाकर बड़ों के सिर पर से शनिश्चरा उतारती हैं बाद में इस बर्तन को अपने सिर पर रखकर नृत्य करते हुए तथा गीत गाते हुए इसे फोड़ देती हैं।ऐसी ही अनेक लोक परंपराएं जिन्हें आज सहेजने की और संरक्षित करने की जरूरत है। यह देश ही ऐसा है जहा त्यवहार,परंपराएं,ही देश की खूब सुरती है इसे बचाए संभाले।।

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