. कर्मो का फल
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
एक बार अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण जी से पूछते हैं कि.. हे वासुदेव! अच्छे और सच्चे लोगों के साथ ही बुरा क्यों होता है…
इस पर भगवान श्री कृष्ण ने एक कहानी सुनाई। इस कहानी में प्रत्येक मनुष्य के सवालों का जवाब वर्णित है।
श्रीकृष्ण कहते हैं कि एक नगर में दो पुरूष रहते थे। पहला व्यापारी जो बहुत ही अच्छा इंसान था धर्म और नीति का पालन करता था भगवान की भक्ति करता था और मन्दिर जाता था।
वह सभी तरह के गलत कार्यों से दूर रहता था।
वहीं दूसरा व्यक्ति जो कि दुष्ट प्रवत्ति का था वो हमेशा ही अनीति और अधर्म के कार्य करता था।
वो भी प्रतिदिन मंदिर जाता परन्तु मन्दिर से पैसे और चप्पल चुराता था झूठ बोलता था और नशा करता था।
एक दिन उस नगर में तेज बारिश हो रही थी और मन्दिर में कोई नही था यह देखकर उस नीच व्यक्ति ने मन्दिर के सारे पैसे चुरा लिए और पुजारी की नजरों से बचकर वहाँ से भाग निकला..
थोड़ी देर बाद जब वो व्यापारी दर्शन करने के उद्देश्य से मन्दिर गया तो उस पर चोरी करने का आरोप लग गया।
वहाँ मौजूद सभी लोग उसे भला-बुरा कहने लगे उसका खूब अपमान हुआ।
जैसे-तैसे कर के वह व्यक्ति मन्दिर से बाहर निकला और बाहर आते ही एक गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी।
वो व्यापारी बुरी तरह से चोटिल हो गया।
इसी वक्त उस दूसरे दुष्ट व्यक्ति को एक नोटो से भरी पोटली हाथ लगी इतना सारा धन देखकर वह दुष्ट खुशी से पागल हो गया और बोला कि आज तो मजा ही आ गया।
पहले मन्दिर से इतना धन मिला और फिर ये नोटों से भरी पोटली।
दुष्ट की यह बात सुनकर वह व्यापारी दंग रह गया।
उसने घर जाते ही घर मे मौजूद भगवान की सारी तस्वीरे निकाल दी और भगवान से नाराज होकर जीवन बिताने लगा।
कुछ वर्षों बाद जब उन दोनों की मृत्यु हो गयी और दोनों यमराज के सामने गए..
उस व्यापारी ने नाराज स्वर में यमराज से प्रश्न किया कि मैं तो सदैव ही अच्छे कर्म करता था, जिसके बदले मुझे अपमान और दर्द मिला..
और इस अधर्म करने वाले दुष्ट को नोटो से भरी पोटली.. आखिर क्यों..?
व्यापारी के सवाल पर यमराज बोले जिस दिन तुम्हारे साथ दुर्घटना घटी थी, वो तुम्हारी जीवन का आखिरी दिन था..
लेकिन तुम्हारे अच्छे कर्मों की वजह से तुम्हारी मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल गयी।
वहीं इस दुष्ट को जीवन मे राजयोग मिलने की सम्भावनाएं थीं लेकिन इसके बुरे कर्मों के चलते वो राजयोग एक छोटे से धन की पोटली में बदल गया।
श्रीकृष्ण कहते हैं कि भगवान हमें किस रूप में दे रहे हैं ये समझ पाना अत्यंत कठिन होता है।
अगर हम आप अच्छे कर्म कर रहे हैं और बुरे कर्मों से दूर हैं तो भगवान निश्चित ही अपनी कृपा हम आप पर बनाए रखेंगे।
जीवन मे आने वाले दुखों और परेशानियों से कभी ये न समझें कि भगवान हमारे साथ नही हैं हो सकता है आपके साथ और भी बुरा होने का योग हो लेकिन आपके कर्मों की वजह से आप उनसे बचे हुए हो।
तो दोस्तों ये थी भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताई गई एक रोचक कहानी जिसमें मनुष्यों के अधिकांश सवालों के उत्तर मौजूद हैं।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
ग्राम व पोस्ट खखैचा प्रतापपुर हंडिया प्रयागराज उत्तर प्रदेश।
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871












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