एक स्त्री में नौ दुर्गा के नौ रूप जाने कैसे ?—
ऐसा कहा और माना भी जा सकता है कि एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र के बिम्ब में नवदुर्गा के नौ स्वरूप समाये हुए हैं। ऐसा किस आधार पर कहा जा रहा है? आइए समझते हैं – – –
1- जन्म ग्रहण करती हुई कन्या शैलपुत्री स्वरूप में होती है !
2 – कौमार्य अवस्था तक ब्रह्मचारिणी का स्वरूप होता है !
3 – विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से वह चंद्रघंटा समान मान्य है !
4 – नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर वह कूष्मांडा स्वरूपिणी है !
5 – संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री स्कन्दमाता स्वरुप हो जाती है !
6 – संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री कात्यायनी स्वरूप है !
7 – अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से वह कालरात्रि स्वरूपिणी है !
8 – संसार (कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार करने से महागौरी होती है !
9 – धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार में अपनी संतान को सिद्धि (समस्त सुख-संपदा) का आशीर्वाद देने वाली सिद्धिदात्री स्वरुप होती है !
उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है और आप सब यह मान भी सकते हैं कि हर स्त्री अपने आप मे कहीं न कही माँ जगदम्बे का ही प्रतिबिंब है। अतः प्रत्येक नारीशक्ति में विराजमान माँ जगदम्बे को इस लेख के माध्यम से सादर प्रणाम।
महामंत्र – जय मां दुर्गा जय मां तारा दयामयी कल्याण करो।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871












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