VIHANGAM YOGASadguru Shri Swatantradeo Ji Maharajईश्वर है! मिलाउंगा!! सद गुरु आचार्य स्वतंत्र देव जी महाराज
कहते हैं दौलत आयेगी कभी मेरे काम, पर बता दो भाइयो, ये धन हुआ किसका भला गुलाम । समझा गये उपदेश हरिश्चन्द्र, कृष्ण, राम, दोलत नहीं रहती है, रहता है सिर्फ नाम।। छूटेगी संपत्ति यहाँ की यहीं पर, तेरे कमर में न ढेला रहेगा। रे मन! ये दो दिन का मेला रहेगा। कायम न जग का काल आ जायेगा, तब क्या होगा? झमेला रहेगा।
साथी बढ़ेंगे, साथी चलेंगे गंगा के जल-बिंदु-पान तक। अर्धागिनी बढ़ेगी तो केवल मकान तक । बेटा भी हक निमाहेगा केवल अग्निदान तक, तो अन्तिम समय में हरि-भजन ही है साथी, हरि के कायम भजन विन तुम अकेला रहेगा। का झमेला रहेगा। न जग
रे मन! ये दो दिन का मेला रहेगा।
आवश्यकता है अपनी पहचान की। अतः हम सब संशय को छोड़कर पूजा की आन्तरिक विधि को भी अपनाये और सदगुरु के ज्ञान से जुड़कर शरणागत भाव से रहते हुए नियमित साधन–अभ्यास करते हुए जीवन के चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति करें। विहंगम योग का ज्ञान अपनाकर हम अपने जीवन को धन्य बनायें।
सद्गुरु आचार्य श्री स्वतन्त्रदेव जी महाराज












Leave a Reply