मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भाजपा के 4 साल की गंदगी का डस्टबिन बना दिया है

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भाजपा के 4 साल की गंदगी का डस्टबिन बना दिया है


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भाजपा के 4 साल की गंदगी का डस्टबिन बना दिया है। कुंभ में कोविड -19 के जानलेवा टेस्टिंग घोटाला को ही देख लीजिए। जिसमें पूरी भाजपा सन्नी दिखती है। इस जानलेवा घोटाला की पूरी जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत डाली जा रही है। एक रणनीति के तहत भाजपा राज में कुंभ सहित जो घोटाले हुए हैं उनको त्रिवेंद्र रूपी डब्बे में डाला जा रहा है। एक भी अधिकारी को अभी हिलाया नहीं गया है। पूरी भाजपा को सांप सूंघ गया है। सांसद, विधायक तथा बयानबाज भाजपाई ऐसा व्यवहार कर रहे हैं कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है और जो हुआ भी उसके लिए त्रिवेंद्र जिम्मेदार थे इसलिए उनको हटा दिया गया था।

तीरथ सिंह रावत 10 मार्च को मुख्यमंत्री बन गए थे। इसके लिए मैक्स टेस्टिंग का ठेका देने की फाइल 12 मार्च को कुंभ मेला स्वास्थ्य अधिकारी ने आगे बढ़ाया। लेकिन जब फर्जी आईडी से फर्जी टेस्टिंग तथा मैक्स के संचालक पंत दंपति का भाजपा से जुड़ने लगा तो उपर के इशारे पर घोटाला का डस्टबिन त्रिवेंद्र को बनाने के लिए कूट रचना कर मैक्स के 12 मार्च के आवेदन पत्र 12 जनवरी का दिखाने का असफल प्रयास किया गया है।

घोटाले के मुख्य खिलाड़ी माने जा रहे शरद पंत का राजनीतिक संबंध भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, हरिद्वार के सांसद एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के सा फोटो सोशल मीडिया में छाए हुए हैं और हरिद्वार सांसद के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करने का फोटो तो लोकप्रिय हो गया है।

राज्य शासन स्तर पर प्रभारी स्वास्थ्य सचिव युगल किशोर पंत, सचिवालय में हेल्थ की सेक्शन की अधिकारी अंबिका से जोड़ा जा रहा है। मैक्स के लिए काम करने वाली नालवा लैब हिसार ने डलफीया लैब भिवानी को काम दिया।उसकी ओर से आशीष वशिष्ठ का नाम सैंपल कलेक्शन में आ रहा है और जांच एजेंसी इस वशिष्ठ का अंबिका वशिष्ठ से कोई नजदीकी कनेक्शन तो नहीं है का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

हैरानी की बात यह कि इस रैकेट ने 3800 टेस्टिंग नेपाली फार्म के एक पत्ते की हैं। 28 हजार की आईडी से 73 हजार टेस्टिंग करना दिखाया है। मैक्स, नालवा, डलफिया तथा डॉ लालचंदानी ने रेपिड एंटीजन टेस्टिंग ही अधिक की है। मैक्स, नालवा व डॉ लालचंदानी ने कुंभ में 57 प्रतिशत टेस्टिंग की है। कुल एक लाख 18 हजार 239 सेंपलों की टेस्टिंग में केवल 39 केस ही पॉजिटिव है।

कोविड टेस्टिंग का यह घोटाला रुपयों का कम और कोविड को फैला कर जान लेने का अधिक है। सीएमओ ने जो मुकदमा दर्ज कराया भी दमदार नहीं है। प्रथमदृष्टया कुंभ मेला सीएमओ के विरुद्ध कार्रवाई हो जानी चाहिए थी क्योंकि उन्होंने आईसीएमआर एप्रुव नहीं होने के बाद भी मैक्स को ठेका क्यों दिया, क्या उन पर किसी राजनेता या शासन में बैठे जिम्मेदार अधिकारी का दबाव था और क्या इसलिए ही मेला सीएमओ पर कोई हाथ नहीं डाल रहा है कि कहीं वह पोल न खोल दे किसके दबाव में उनको 12 मार्च की डेट को कूटरचना कर 12 जनवरी करना पड़ा है।

इस जानलेवा कोविड टेस्टिंग घोटाला के संबंध में समाजसेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार सुभाष शर्मा ने जांच अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ सौरभ गहरवार को घोटाले संबंधित कुछ महत्वपूर्ण अभिलेख प्रस्तुत किए हैं। जांच अधिकारी ने माना कि उनसे कुछ नए तथा महत्वपूर्ण अभिलेख प्राप्त हुए हैं जो जांच में सहायक होंगे।

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