Hacklink panel

Hacklink Panel

Hacklink panel

Hacklink

Hacklink panel

Backlink paketleri

Hacklink Panel

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink panel

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink panel

Eros Maç Tv

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink satın al

Hacklink satın al

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Illuminati

Hacklink

Hacklink Panel

Hacklink

Hacklink Panel

Hacklink panel

Hacklink Panel

Hacklink

betcio

Masal oku

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink

alobet

Hacklink

Hacklink

Hacklink

anadoluslot

Hacklink panel

Postegro

Masal Oku

Hacklink

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink Panel

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink

Hacklink

Hacklink Panel

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Buy Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink

Hacklink satın al

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink panel

Hacklink

Masal Oku

Hacklink panel

Hacklink

Hacklink

หวยออนไลน์

Hacklink

Hacklink satın al

Hacklink Panel

Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

18 April : भारतरत्न, पद्मविभूषण महर्षि डॉ॰ धोंडो केशव कर्वे विधवाओं के पुनर्विवाह और समुचित शिक्षा पर बल दिया !

Dhondo Keshav Karve 1958 stamp of India

महर्षि डॉ॰ धोंडो केशव कर्वे जी का जन्म अप्रेल १८, १८५८ में हुआ था ! वे एक प्रसिद्ध समाज सुधारक थेऔर उन्होने महिला शिक्षा और विधवा विवाह मे महत्त्वपूर्ण योगदान किया।
महर्षि डॉ॰ धोंडो केशव कर्वे जी द्वारा, मुम्बई में स्थापित एस एन डी टी महिला विश्वविघालय भारत का प्रथम महिला विश्वविघालय है ।वे वर्ष १८९१ से वर्ष १९१४ तक पुणे के फरगुस्सन कालेज में गणित के अध्यापक थे। उन्हे वर्ष १९५८ में भारत रत्न से सम्मनित किया गया।

महर्षि डॉ॰ धोंडो केशव कर्वे जी ने अपना जीवन महिला उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।

महर्षि डॉ॰ धोंडो केशव कर्वे जी जन्म महाराष्ट्र के मुरुड नामक कस्बे शेरावाली, जिला रत्नागिरी, मे एक गरीब परिवार में हुआ था।
पिता का नाम श्री केशवपंत और माता का नाम मॉ लक्ष्मीबाई था !
आरंभिक शिक्षा मुरुड में हुई और उसके पश्चात् सतारा में दो ढाई वर्ष अध्ययन करके मुंबई के राबर्ट मनी स्कूल में दाखिल हुए।
1884 ई. में उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से गणित विषय लेकर बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। बी.ए. करने के बाद वे एलफिंस्टन स्कूल में अध्यापक हो गए।
महर्षि डॉ॰ धोंडो केशव कर्वे जी का विवाह 15 वर्ष की आयु में ही हो गया था और बी.ए. पास करने तक उनके पुत्र की अवस्था ढाई वर्ष हो चुकी थी। अत: खर्च चलाने के लिए स्कूल की नौकरी के साथ-साथ लड़कियों के दो हाईस्कूलों में वे अंशकालिक काम भी करते थे।

गोपालकृष्णन गोखले के निमंत्रण पर 1891 ई. में वे पूना के प्रख्यात फ़र्ग्युसन कालेज में प्राध्यापक बन गए। यहाँ लगातार 23 वर्ष तक सेवा करने के उपरांत 1914 ई. में उन्होंने अवकाश ग्रहण किया।

भारत में हिंदू विधवाओं की दयनीय और शोचनीय दशा देखकर महर्षि डॉ॰ धोंडो केशव कर्वे जी, मुंबई में पढ़ते समय ही, विधवा विवाह के समर्थक बन गए थे। उनकी पत्नी का देहांत भी उनके मुंबई प्रवास के बीच हो चुका था।
अत: 11 मार्च 1893 ई. को उन्होंने गोड़बाई नामक विधवा से विवाह कर, विधवा विवाह संबंधी प्रतिबंध को चुनौती दी।

इसके लिए उन्हें घोर कष्ट सहने पड़े। मुरुड में उनको समाज से बहिष्कृत घोषित कर दिया गया। उनके परिवार पर भी प्रतिबंध लगाए गए।
महर्षि कर्वे ने “विधवा विवाह संघ” की स्थापना की। किंतु शीघ्र ही उन्हें पता चल गया कि इक्के-दुक्के विधवा विवाह करने अथवा विधवा विवाह का प्रचार करने से विधवाओं की समस्या हल होनेवाली नहीं है। अधिक आवश्यक यह है कि विधवाओं को शिक्षित बनाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया जाए ताकि वे सम्मानपूर्ण जीवन बिता सकें।
अत: 1896 ई. में उन्होंने “अनाथ बालिकाश्रम एसोसिएशन” बनाया और जून, 1900 ई. में पूना के पास हिंगणे नामक स्थान में एक छोटा सा मकान बनाकर “अनाथ बालिकाश्रम” की स्थापना की गई।

4 मार्च 1907 ई. को उन्होंने “महिला विद्यालय” की स्थापना की जिसका अपना भवन 1911 ई. तक बनकर तैयार हो गया।

काशी के बाबू शिवप्रसाद गुप्त जापान गए थे और वहाँ के महिला विश्वविद्यालय से बहुत प्रभावित हुए थे।

जापान से लौटने पर 1915 ई. में गुप्त जी ने उक्त महिला विश्वविद्यालय से संबंधित एक पुस्तिका महर्षि कर्वे को भेजी। उसी वर्ष दिसंबर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का बंबई में अधिवेशन हुआ।

कांग्रेस अधिवेशन के साथ ही “नैशनल सोशल कानफ़रेंस” का अधिवेशन होना था जिसके अध्यक्ष महर्षि कर्वे चुने गए। गुप्त जी द्वारा प्रेषित पुस्तिका से प्रेरणा पाकर महर्षि कर्वे ने अपने अध्यक्षीय भाषण का मुख्य विषय “महाराष्ट्र में महिला विश्वविद्यालय” को बनाया।

महात्मा गांधी ने भी महिला विश्वविद्यालय की स्थापना और मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा देने के विचार का स्वागत किया।

फलस्वरूप 1916 ई. में,महर्षि कर्वे के अथक प्रयासों से, पूना में महिला विश्वविद्यालय की नींव पड़ी, जिसका पहला कालेज “महिला पाठशाला” के नाम से 16 जुलाई 1916 ई. को खुला।
महर्षि कर्वे इस पाठशाला के प्रथम प्रिंसिपल बने। लेकिन धन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने अपना पद त्याग दिया और धनसंग्रह के लिए निकल पड़े।
चार वर्ष में ही सारे खर्च निकालकर उन्होंने विश्वविद्यालय के कोष में दो लाख 16 हजार रुपए से अधिक धनराशि जमा कर दी। इसी बीच बंबई के प्रसिद्ध उद्योगपति सर विठ्ठलदास दामोदर ठाकरसी ने इस विश्वविद्यालय को 15 लाख रुपए दान दिए।

अत: विश्वविद्यालय का नाम श्री ठाकरसी की माता के नाम पर “श्रीमती नत्थीबाई दामोदर ठाकरसी (एस.एन.डी.टी.) विश्वविद्यालय रख दिया गया और कुछ वर्ष बाद इसे पूना से मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया। 70 वर्ष की आयु में महर्षि कर्वे उक्त विश्वविद्यालय के लिए धनसंग्रह करने यूरोप, अमरीका और अफ्रीका गए।

सन् 1936 ई. में गांवों में शिक्षा के प्रचार के लिए महर्षि कर्वे ने “महाराष्ट्र ग्राम प्राथमिक शिक्षा समिति” की स्थापना की, जिसने धीरे-धीरे विभिन्न गाँवों में 40 प्राथमिक विद्यालय खोले। स्वतंत्रताप्राप्ति के बाद यह कार्य राज्य सरकार ने सँभाल लिया।

सन् 1915 ई. में महर्षि कर्वे द्वारा मराठी भाषा में रचित “आत्मचरित” नामक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी थी। 1942 ई. में काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉ॰ लिट्. की उपाधि प्रदान की।
1954 ई. में उनके अपने महिला विश्वविद्यालय ने उन्हें एल.एल.डी. की उपाधि दी।

1955 ई. में भारत सरकार ने उन्हें “पद्मविभूषण” से अलंकृत किया और 100 वर्ष की आयु पूरी हो जाने पर, 1957 ई. में मुंबई विश्वविद्यालय ने उन्हें एल.एल.डी. की उपाधि से सम्मानित किया।
1958 ई. में भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान “भारतरत्न” से विभूषित किया।

भारत सरकार के डाक तार विभाग ने इनके सम्मान में एक डाक टिकट निकालकर इनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की थी। देशवासी आदर से उन्हें महर्षि कहते थे1 9 नवम्बर 1962 ई. को 104 वर्ष की आयु में “महर्षि” कर्वे का शरीरांत हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *