बंगाल चुनाव के नजदीक आते ही शियासी हलकों में एक नाम फुरफुरा शरीफ़ चर्चा के केन्द्र में है, भाजपा से लगातार मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब फुरफुरा शरीफ की और टकटकी लगाए हुए है, जबकि फुरफुरा शरीफ़ के मौलवी मौलाना अब्बास सिद्दीकी ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कि है।
पूर्व में अपनी पार्टी बना कर चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाले फुरफुरा शरीफ़ के मौलवी ने अससुद्दीन ओवैसी को तगड़ा झटका दे चुके हैं।
ओवैसी ने बंगाल में चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही मौलाना अब्बास सिद्दीकी से मुलाक़ात फुरफुरा शरीफ की अहमियत को बताता है।
मौलाना अब्बास सिद्दीकी भी इस बात को समझते हैं इसलिए अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की बात करके अपनी बिसात बिछा दिया है, हालांकि खुद को व्यस्त बताकर चुनाव नही लड़ने की बात कहकर राजनीतिक समीकरण को साधने के रास्ता भी खुला रखा है।
बंगाल में मुस्लिम आबादी 27 प्रतिशत के करीब है, जिसमे बड़ी संख्या में बंगाली मुसलमान फुरफुरा शरीफ़ से जुड़ा हुआ है, ये बात और है कि उन्हें वोट बैंक में में मौलाना किस हद बदल पाते हैं।
ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि उन्हें फुरफुरा शरीफ का समर्थन प्राप्त है, भाजपा भी गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।







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