Jan Media TV

Inform Engage Inspire

Advertisement

ईश्वर है मिलाऊँगा!

ईश्वर है मिलाऊँगा!

ईश्वर है मिलाऊँगा!

है। यह एक ऐसी पद्धति है जो मात्र 15 मिनट के नियमित अभ्यास के द्वारा आपकी पूर्ण आत्मिक शक्ति को जागृत कर देती है। इतना ही नहीं, इस विलक्षण पद्धति के अभ्यास हेतु आपको कोई असामान्य जीवनशैली अपनाने की भी आवश्यकता नहीं है। विहंगम योग संस्थान की स्थापना सन् 1924 ई० में सदगुरु सदाफलदेव जी महाराज ने की थी। आज देश-विदेश में स्थित सैकड़ों केन्द्र लाखों लोगों को सेवा प्रदान कर रहे है। अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज द्वारा प्रणीत ब्रह्मविद्या विहंगम योग के द्वारा मानव जीवन के पुरुषार्थ चतुष्टय धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति। प्राप्ति होती है।

विहंगम योग एक आध्यात्मिक संस्थान ही नहीं बल्कि योग का सत्य मार्ग है। योग कहते हैं आत्मा एवं परमात्मा के मिलन को विहंगम योग वही सनातन वैदिक मार्ग है, जिसे ब्रह्मविद्या भी कहते हैं। इस वैज्ञानिक पद्धति द्वारा आप अपने जीवन में कुछ इस तरह से आगे बढ़ते हैं:

दिनांक

२एवं३मई 2022
समय
प्रातः 6:00 से 8:00
अपराहन 1:00 से 2:00 अपराहन 2:00 से 3:00
सायं 4:00 बजे से
रात्रि 7:00 बजे से

सन्त प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की दिव्यवाणी

सत्संग अमृत प्रतिदिन रात्रि 9 बजे

अध्यात्म-पिपासु इनकी ‘स्वर्वेद कथा’ से न सिर्फ शान्ति पा रहे हैं बल्कि सत्य का निर्मात ज्ञान प्राप्त कर अपने जीवन का आध्यात्मिक निर्माण कर रहे हैं।

विचारों के उतार-चढ़ाव पर अल्पकाल में पूर्ण नियन्त्रण ॐ अभूतपूर्व शान्ति एवं स्थिरता का अनुभव।

ॐ आत्मसाक्षात्कार अपने स्वरूप आत्मा का दर्शन।

● अन्ततः परमात्मा-प्राप्ति द्वारा असीम, अनन्त शान्ति व आनन्द की समारोह के सायंकालीन सत्र और में सत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की दिव्यवाणी (जय स्वर्वेद कथा) के रूप में प्राप्त होगी। सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने मानवमात्र के कल्याणार्थ स्वर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। इनकी दिव्य आध्यात्मिक वाणी गूढतम आध्यात्मिक रहस्यों को बड़े ही सरल शब्दों में अनावृत कर देती है।
कार्यक्रम विवरण
उक्त पावन अवसर पर 551 कुण्डीय विश्वशान्ति वैदिक महायज्ञ का भी आयोजन किया जा रहा है। प्राचीन काल से चले आ रहे इस वैदिक महायज्ञ से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दोनों रूप से सभी जग-जीवों को अनेक लाभ होते हैं। इस हवन-यज्ञ से जलवायु की शुद्धता, वृष्टि शुद्ध एवं शारीरिक स्वस्थता के साथ-साथ भीतिक कामनाओं की पूर्ति भी अवश्य होती है। इस प्रकार विहंगम योग संस्थान के माध्यम से भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार के कल्याण किये जाते हैं।
उक्त अवसर पर पधार कर सन्त प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज की दिव्यवाणी (जय स्वर्वेद कथा), सद्गुरुदेव की अमृतवाणी एवं लाभ से अपने भौतिक एवं पारमार्थिक जीवन को मंगलमय बनायें।

● निवेदक चरणरज सेवक एवं सेविका
श्री के. के. श्रीवास्तव, श्रीमती रत्ना श्रीवास्तव एवं विहंगम योग संत समाज प्रतापगढ़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *