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SeedMother Padmshree Rahibai Soma Popare बीजमात्रा पद्मश्री राहीबाई सोमा पोपेरे देसी बीजों को बचाने की मुहिम

SeedMother Padmshree Rahibai Soma Popare बीजमात्रा पद्मश्री राहीबाई सोमा पोपेरे देसी बीजों को बचाने की मुहिम

बीजमाता पद्मश्री
ये हैं महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के एक छोटे से गाँव की राहीबाई सोमा पोपेरे। ये ‘बीजमाता’/सीडमदर के नाम प्रसिद्ध है।
ये देसी बीजों को बचाने व उनके संवर्धन को लेकर काम करती है। कभी स्कूल नहीं गई और एक जनजाति परिवार से संबंध रखने वाली है राहीबाई। इनके बीज के प्रति ज्ञान को वैज्ञानिक भी लोहा मानते हैं। अपनी जिद्द और लगन से ये देसी बीजों का एक बैंक बनाई है जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। ये देसी बीजों को बचाने व उसके समर्थन में तब आई जब इनका पोता जहरीली सब्जी खाने से बीमार पड़ गया। यही कोई बीस साल पहले। तब से ये जैविक खेती के साथ-साथ देसी बीजों के प्रयोग व उनके संरक्षण को प्राथमिकता देने लगी। ये कहती है कि भले ही हाइब्रिड बीजों की तुलना में ये देसी बीज कम उपज देते हैं लेकिन ये आपका स्वास्थ्य खराब नहीं करती,आप बीमारियों के चपेट में नहीं आते।
56 की साल राहीबाई सोमा पोपरे आज पारिवारिक ज्ञान और प्राचीन परंपराओं की तकनीकों के साथ जैविक खेती को एक नया आयाम दे रही हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र में आज परंपरागत बीजों की मांग सबसे ज्यादा है।
और आज जो ये बीजों के माँग की आपूर्ति जो रही है तो बस इसलिए हो रहे हैं इनको जिंदा रखने के लिए राहीबाई जैसे लोग जीवित हैं। नहीं तो ज्यादा उपज और फायदा कमाने के चक्कर में देसी बीजों को लोग कहाँ पहुंचा दिए हैं वो सबको भलीभांति मालूम है। आज से 20-25 साल जिस बीमारी का अता पता नहीं था वो अब फैमिलियर होते जा रहा है।
‘पद्मश्री’ बीजमाता राहीबाई जी को बारम्बार प्रणाम है।
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