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Kachra Mukt Shahar. Kachra Mukt Rashtra ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कर कचरा मुक्त शहर हेतु दे योगदान-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

Kachra Mukt Shahar. Kachra Mukt Rashtra ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कर कचरा मुक्त शहर हेतु दे योगदान-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

🛑 एकल-उपयोग प्लास्टिक

🔴 कचरा मुक्त शहर-कचरा मुक्त राष्ट्र

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कर कचरा मुक्त शहर हेतु दे योगदान-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

ऋषिकेश, 3 जनवरी। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने देशवासियों से कचरा प्रबंधन का आह्वान करते हुये कहा कि शहरों को कचरा मुक्त करने के लिये संस्थागत तंत्र विकसित करने के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान प्रदान करना होगा। अपनी गलियों, गावों और शहरों को स्थायी रूप से स्वच्छ रखने के लिये बच्चों को बचपन से ही संस्कारित करना होगा।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि कचरा मुक्त शहरों के निर्माण के लिये हमें ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन करने के साथ ही एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग बंद करना होगा। भारत में समग्र स्वच्छता विकसित करने के लिये अपशिष्ट प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण कारक है और इसके लिये एक स्मार्ट फ्रेमवर्क तैयार करना होगा तथा सभी को इसका पालन भी करना होगा।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि शहरों और गांवों को एक मॉडल के रूप में विकसित कर उनकी समग्र स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा। रिपोर्ट के आधार पर भारत को विश्व में सर्वाधिक कचरा उत्पन्न करने वाला राष्ट्र कहा गया है। भारत में प्रति व्यक्ति अपशिष्ट उत्पादन प्रतिदिन लगभग 200 ग्राम से 600 ग्राम तक होता है। नगरपालिका द्वारा लगभग 75.80 प्रतिशत कचरा एकत्र किया जाता है और इस कचरे का केवल 22.28 प्रतिशत ही संसाधित और उपचारित होता है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2050 तक भारत का कचरा उत्पादन आज की तुलना में दोगुना हो जाएगा इसलिये भारत के प्रत्येक व्यक्ति को आज से ही इस ओर विशेष ध्यान देना होगा।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत में प्रत्येक वर्ष एक व्यक्ति द्वारा औसतन 30 से 50 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग करके फेंक दिया जाता है, एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक या डिस्पोजेबल प्लास्टिक ऐसा प्लास्टिक है जिसे फेंकने या पुनर्नवीनीकरण से पहले केवल एक बार ही उपयोग किया जाता है। यथा प्लास्टिक की थैलियाँ, स्ट्रॉ, कॉफी बैग, सोडा और पानी की बोतलें तथा अधिकांशतः खाद्य पैकेजिंग के लिये प्रयुक्त होने वाला प्लास्टिक इसे विघटित होने में सैकड़ों साल लग जाते हैं इसलिये वर्ष 2022 में संकल्प लें कि सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, भारत में प्रत्येक वर्ष उत्पादित 9.46 मिलियन टन प्लास्टिक कचरे में से 43 प्रतिशत सिंगल यूज प्लास्टिक है इसलिये कोशिश करे कि जरूरत पड़ने पर बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक को ही उपयोग में लाये।

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2022 में चीन को पिछाड सकता है भारत

Goldman Sachs के अनुसार भारत आने वाले 2022 में चीन को पिछाड सकता है। इंडियन इकोनॉमी ग्रोथ रेट सुपर फास्ट स्पीड से बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है जो चीन के इकोनॉमी ग्रोथ रेट से कही ज्यादा होगा।

2021 में 8% ग्रोथ का है अनुमान

कोरोना महामारी के समय से भारत व अन्य देश आर्थिक मंदी से झेल रहे है। लेकिन भारत अब इस मंदी से लगातार निजात पा रहा है। अर्थव्यवस्था पटरी पर आते दिख रहा है। Goldman Sachs ने अपने हालिया रिपोर्ट GS Macro Outlook 2022 : the long road to higher rate में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक पक्ष रखा है। उम्मीद जताया गया है की भारतीय अर्थव्यवस्था की रिकवरी रेट 8% होगा। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में ग्रोथ रेट 9.1% रहेगा जो चीन से ज्यादा रहेगा। 2023 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को नया आयाम देता हुआ यह जीडीपी ग्रोथ 6.3% रहेगा।

चीन के मुकाबले बेहतर रहेगा भारत का ग्रोथ रेट

जहां चीन की इकोनॉमी 2021 में 7.8% से 2022 में 4.8% ग्रोथ रहने का कयास रिपोर्ट में लगाया गया है। वही 2023 में यह ग्रोथ रेट 4.6% रह सकता है।

अगर बात अमेरिका की, की जाय तो GDP ग्रोथ रेट 2021 में 5.5% , 2022 में 3.9% और 2023 में 2.1% रह सकता है।

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SeedMother Padmshree Rahibai Soma Popare बीजमात्रा पद्मश्री राहीबाई सोमा पोपेरे देसी बीजों को बचाने की मुहिम

SeedMother Padmshree Rahibai Soma Popare बीजमात्रा पद्मश्री राहीबाई सोमा पोपेरे देसी बीजों को बचाने की मुहिम

बीजमाता पद्मश्री
ये हैं महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के एक छोटे से गाँव की राहीबाई सोमा पोपेरे। ये ‘बीजमाता’/सीडमदर के नाम प्रसिद्ध है।
ये देसी बीजों को बचाने व उनके संवर्धन को लेकर काम करती है। कभी स्कूल नहीं गई और एक जनजाति परिवार से संबंध रखने वाली है राहीबाई। इनके बीज के प्रति ज्ञान को वैज्ञानिक भी लोहा मानते हैं। अपनी जिद्द और लगन से ये देसी बीजों का एक बैंक बनाई है जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। ये देसी बीजों को बचाने व उसके समर्थन में तब आई जब इनका पोता जहरीली सब्जी खाने से बीमार पड़ गया। यही कोई बीस साल पहले। तब से ये जैविक खेती के साथ-साथ देसी बीजों के प्रयोग व उनके संरक्षण को प्राथमिकता देने लगी। ये कहती है कि भले ही हाइब्रिड बीजों की तुलना में ये देसी बीज कम उपज देते हैं लेकिन ये आपका स्वास्थ्य खराब नहीं करती,आप बीमारियों के चपेट में नहीं आते।
56 की साल राहीबाई सोमा पोपरे आज पारिवारिक ज्ञान और प्राचीन परंपराओं की तकनीकों के साथ जैविक खेती को एक नया आयाम दे रही हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र में आज परंपरागत बीजों की मांग सबसे ज्यादा है।
और आज जो ये बीजों के माँग की आपूर्ति जो रही है तो बस इसलिए हो रहे हैं इनको जिंदा रखने के लिए राहीबाई जैसे लोग जीवित हैं। नहीं तो ज्यादा उपज और फायदा कमाने के चक्कर में देसी बीजों को लोग कहाँ पहुंचा दिए हैं वो सबको भलीभांति मालूम है। आज से 20-25 साल जिस बीमारी का अता पता नहीं था वो अब फैमिलियर होते जा रहा है।
‘पद्मश्री’ बीजमाता राहीबाई जी को बारम्बार प्रणाम है।
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UPSC CSE Result 2020 Prayagraj Toppers : सिविल सेवा परीक्षा में चमके संगमनगरी के मेधावी, टॅाप 100 में 3 प्रयागराज से

UPSC CSE Result 2020 Prayagraj Toppers : सिविल सेवा परीक्षा में चमके संगमनगरी के मेधावी, टॅाप 100 में 3 प्रयागराज से

UPSC CSE Result 2020 : सिविल सेवा परीक्षा में चमके संगमनगरी के मेधावी, टॅाप 100 में 3 प्रयागराज से

UPSC CSE Result 2020 : संघ लोक सेवा आयोग की ओर से शुक्रवार को जारी सिविल सेवा परीक्षा 2020 के परिणाम में संगमनगरी के मेधावियों ने सफलता हासिल की। शाश्वत त्रिपुरारी ने 19वीं रैंक, सृजन वर्मा ने 39वीं तो वहीं अपूर्वा त्रिपाठी ने 68वीं रैंक हासिल कर शहर को गौरवान्वित किया।
आईआईटी दिल्ली से 2018 में बीटेक करने वाले शाश्वत का चयन सिविल सेवा परीक्षा 2019 में आईपीएस के लिए हुआ था और वे फिलहाल हैदाराबाद में ट्रेनिंग कर रहे हैं। सिविल सेवा परीक्षा 2019 में शाश्वत की बड़ी बहन सोनाली का भी चयन हुआ था। साउथ मलाका के रहने वाले शाश्वत के पिता शरद चन्द्र मिश्र दूरदर्शन महानिदेशालय दिल्ली में उप महानिदेशक के पद पर तैनात हैं। प्रयागराज में निदेशक रह चुके हैं। वहीं मां पूनम मिश्रा यूपी भवन में मुख्य वित्त अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। सेंट जोसेफ कॉलेज से 2014 में 95.2 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं करने वाले शाश्वत का चयन आईआईटी में हो गया था।
सृजन ने पहले प्रयास में ही लहराया सफलता का परचम

सृजन वर्मा को पहले प्रयास में ही 39वीं रैंक मिली है। सेंट जोसेफ कॉलेज से 2012 में 93 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने आईएसएम धनबाद से 2017 में बीटेक किया। उसके बाद 2018 से दिल्ली में रहकर सिविल सेवा की कोचिंग करने लगे। 2018 में इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस में उन्हें ऑल इंडिया तीसरी रैंक मिली थी। उसके बाद ट्रेनिंग से छुट्टी लेकर आईएएस की तैयारी करने लगे। इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस के तहत रेलवे में चयन हो चुका है और फिलहाल इनकी ट्रेनिंग महाराष्ट्र में चल रही है। खाली समय में चेक, बैडमिंटन और क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं। आरकेपुरम करबला के रहने वाले सृजन के पिता नीरज वर्मा उत्तर मध्य रेलवे मंडल विद्युत अभियंता के पद से पिछले महीने सेवानिवृत्त हुए हैं। मां अनुपमा किदवई मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज हिम्मतगंज में शिक्षक हैं। बड़ी बहन अरुनी वर्मा आर्मी अस्पताल दिल्ली में सर्जरी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं।

अपूर्वा त्रिपाठी को मिली 68वीं रैंक

अपूर्वा त्रिपाठी ने 68वीं रैंक हासिल की है। उन्हें दूसरे प्रयास में सफलता मिली है। मुख्य परीक्षा में उनका वैकल्पिक विषय भूगोल था। इससे पहले आईएएस 2019 की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता मिली थी। 25 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली अपूर्वा ने बताया कि उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की थी। वाईएमसीए सेंटेनरी स्कूल एंड कॉलेज से 2013 में 84 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं करने के बाद उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से 2018 में बीटेक किया। उसके बाद अगस्त 2018 से घर पर रहकर सिविल सेवा की तैयारी करने लगीं। उनके पिता दिनेश त्रिपाठी सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता हैं। मूलरूप से गोरखपुर की बांसगांव तहसील के मलांव गांव के निवासी दिनेश त्रिपाठी वर्ष 2000 से प्रयागराज में गंगानगर राजापुर में रह रहे हैं। मां सीमा त्रिपाठी गृहणी हैं। छोटी बहन अंजली बीएससी और छोटा भाई अनिमेष बीटेक कर रहा है।

सात माह में तीन सफलता
अपूर्वा त्रिपाठी ने महज सात महीने में तीन बड़ी सफलता हासिल की है। इसी साल 17 फरवरी को घोषित पीसीएस 2019 के परिणाम में उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ था। उसके बाद 12 अप्रैल को जारी पीसीएस 2020 के रिजल्ट में एआरटीओ के पद पर सफलता मिली। अब आईएएस के परिणाम में 68वीं रैंक ने मन की मुराद पूरी कर दी।

पेपर पैटर्न जरूर देखें

प्रतियोगी छात्रों को अपूर्वा त्रिपाठी ने सलाह दी है कि जिस परीक्षा की भी तैयारी कर रहे हैं उसके पूर्व के वर्षों के प्रश्नपत्रों को जरूर देखें। सामान्य अध्ययन के लिए एनसीईआरटी और रिफरेंस बुक के अलावा करेंट अफेयर्स के लिए वेबसाइट के कंटेट को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करें। टेस्ट सीरीज ज्वाइन करने से पेपर लिखने में मदद मिलती है क्योंकि लिखने की प्रैक्टिस होना जरूरी है।

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Agni-5 ICBM Missile Test , अग्नि 5 से डरे पाक और चीन , आधी दुनिया इसकी रेंज में, जानिये इसके बारे में सब कुछ

Agni 5 Missile Test: 8 देशों के एलिट ग्रुप में भारत की एंट्री से हड़बड़ाया चीन, कहा- ये गैरकानूनी है


आ रही भारत की महामिसाइल…आधी दुनिया इसकी रेंज में, डरे चीन-PAK


Agni 5 Missile Test and China Reaction: भारत द्वारा अग्नि 5 (Agni-V) मिसाइल के एक और परीक्षण पर चीन (China) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन विदेश मंत्रालय ने भारत के इस मिसाइल टेस्ट को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के नियमों के खिलाफ बताया है। ये अग्नि सीरीज की 5वीं मिसाइल है। 19 अप्रैल 2012 को उड़ीसा में इसका पहला टेस्ट किया गया था, जो सफल रहा था। जनवरी 2015 में मिसाइल का पहला कैनिस्टर टेस्ट किया गया था। तब मिसाइल को रोड मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया गया था। 10 दिसंबर 2018 को मिसाइल का आखिरी टेस्ट किया गया। खास बात ये है कि अब तक मिसाइल के 7 टेस्ट किए जा चुके हैं, सभी सफल रहे हैं। अग्नि-5 को 2020 में ही सेना में शामिल करने की तैयारी थी, लेकिन कोरोना की वजह से टेस्ट में देरी हो गई।
भारत की परमाणु शक्ति संपन्न अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का आज परीक्षण किया जा सकता है. इस मिसाइल के परीक्षण को लेकर चीन समेत कई देशों ने अपनी भौहें टेढ़ी-मेढ़ी की हैं. लेकिन भारत पहले ही अग्नि-5 मिसाइल का सात बार सफल परीक्षण कर चुका है. चीन की नाराजगी इसलिए है क्योंकि अग्नि-5 मिसाइल की रेंज में उसका पूरा देश आ रहा है. ऐसा कोई शहर नहीं हैं जो इस मिसाइल के हमले से बच सके. आइए जानते हैं इस मिसाइल की खासियतें


अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-V ICBM) को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने मिलकर बनाया है. इस मिसाइल की रेंज 5000 से 8000 किलोमीटर बताई जा रही है. इसकी रेंज पर विवाद है. कई मीडिया संस्थानों में प्रकाशित खबर के अनुसार चीन समेत कुछ देशों का कहना है कि भारत सरकार इस मिसाइल की सही रेंज का खुलासा नहीं कर रही है. मुद्दा ये नहीं है कि इसकी रेंज कितनी है, चीन और कई देशों को यह डर है कि इस मिसाइल की जद में उनका पूरा का पूरा क्षेत्रफल आ रहा है.

अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-V ICBM) का वजन 50 हजार किलोग्राम है. यह 17.5 मीटर लंबी है. इसका व्यास 2 मीटर यानी 6.7 फीट है. इसके ऊपर 1500 किलोग्राम वजन का परमाणु हथियार लगाया जा सकता है. इस मिसाइल में तीन स्टेज के रॉकेट बूस्टर हैं जो सॉलिड फ्यूल से उड़ते हैं. इसकी रफ्तार ध्वनि की गति से 24 गुना ज्यादा है. यानी एक सेकेंड में 8.16 किलोमीटर की दूरी तय करती है. यह 29,401 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दुश्मन पर हमला करती है. इसमें रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, जीपीएस, NavIC सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम लगा हुआ है.


अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-V ICBM) अपने निशाने पर सटीकता से हमला करता है. किसी वजह से अगर सटीकता में अंतर आता भी है तो वह 10 से 80 मीटर का ही होगा. लेकिन यह अंतर किसी मिसाइल की घातकता को कम नहीं करती है. इसे लॉन्च करने के लिए जमीन पर चलने वाले मोबाइल लॉन्चर का उपयोग किया जाता है. इसे ट्रक पर लोड करके सड़क से किसी भी स्थान पर पहुंचाया जा सकता है. इस मिसाइल के बारे में वैज्ञानिक एम. नटराजन ने साल 2007 में पहली बार योजना बनाई थी.

Agni-5 ICBM Missile

भारत अगर इस मिसाइल को दागता है तो वह पूरे एशिया, यूरोप, अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक हमला कर सकता है. इस मिसाइल की सबसे खास बात है इसकी MIRV तकनीक (मल्टिपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स). इस तकनीक में मिसाइल के ऊपर लगाए जाने वॉरहेड (Warhead) में एक हथियार के बजाय कई हथियार लगाए जा सकते हैं. यानी एक मिसाइल एक साथ कई टारगेट पर निशाना लगा सकता है.

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ऐसा माना जा रहा है कि अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-V ICBM) की तैनाती स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (Strategic Forces Command) में किया जा सकता है. इस कमांड के तहत ही भारत की सभी मिसाइलों का संचालन किया जाता है. इसमें पृथ्वी, अग्नि और सूर्य जैसी मिसाइलें शामिल हैं. सूर्य मिसाइल अभी बनी नहीं है. इसकी रेज 12 से 16 हजार किलोमीटर होगी. उससे पहले अग्नि-6 बनाई जाएगी जो 8 से 12 हजार किलोमीटर रेंज की होगी. इसी कमांड में समुद्र में मौजूद सैन्य मिसाइलें भी शामिल हैं. जैसे- धनुष, सागरिका आदि. (फोटोःगेटी)

Agni-5 ICBM Missile

अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-V ICBM) का पहला सफल परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को हुआ था. उसके बाद 15 सितंबर 2013, 31 जनवरी 2015, 26 दिसंबर 2016, 18 जनवरी 2018, 3 जून 2018 और 10 दिसंबर 2018 को सफल परीक्षण हुए. कुल मिलाकर अग्नि-5 मिसाइल के सात सफल परीक्षण हो चुके हैं. इन परीक्षणों में इस मिसाइल को अलग-अलग मानकों पर जांचा गया. जिसमें पता चला कि यह मिसाइल दुश्मन को बर्बाद करने के लिए बेहतरीन हथियार है. इसकी सटीकता, गति और विध्वंसकारी ताकत दुश्मन के पसीने निकाल देगी.

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चीन में पीएलए एकेडेमी ऑफ मिलिट्री साइंसेज के रिसर्चर डू वेनलॉन्ग ने मीडिया से कहा था कि अग्नि-5 मिसाइल की रेंज 8000 किलोमीटर है. लेकिन भारत की सरकार इस रेंज का खुलासा नहीं कर रही है. ताकि दुनियाभर के देश उसपर आपत्ति न उठाएं. इसलिए अग्नि-5 मिसाइल की रेंज को गुप्त रखा गया है. मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि अग्नि-5 मिसाइल की रेंज को बढ़ाया जा सकता है. 50 हजार किलोग्राम वजन वाली इस अग्नि-5 मिसाइल को 200 ग्राम का कंट्रोल एंड गाइडेंस सिस्टम करता है नियंत्रित. यह इस मिसाइल पर ही लगा होता है. इसे सिस्टम ऑन चिप (SOC) आधारित ऑन-बोर्ड कंप्यूटर कहते हैं.

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अग्नि-5 मिसाइल में जिस MIRV तकनीक यानी कई वॉरहेड की बात हो रही थी. उसमें मिसाइल की नाक पर दो से 10 हथियार लगाए जा सकते है. यानी एक ही मिसाइल एक साथ कई सौ किलोमीटर में फैले अलग-अलग 2 से 10 टारगेट पर सटीक निशाना लगा सकता है. यह भी हो सकता है कि अगर टारगेट बहुत बड़ा है तो एक ही मिसाइल के 10 वॉरहेड उसके अलग-अलग हिस्सों को तबाह कर देंगे. ताकि दुश्मन को सिर उठा